Sangrur में उग्र हुआ किसान आंदोलन, पुलिस बैरिकेड्स तोड़ रेलवे ट्रैक पर पहुंचे प्रदर्शनकारी
punjabkesari.in Thursday, Sep 17, 2026 - 06:22 PM (IST)
सुनाम(बांसल): सुनाम में भारतीय किसान यूनियन एकता (आजाद) द्वारा आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रदेशाध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा की कोठी के समक्ष शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन चौथे दिन और अधिक उग्र हो गया। राज्य स्तरीय नेता लखवीर सिंह दायुधर के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं, युवाओं और हजारों किसानों ने कल किए गए ऐलान के तहत ठीक दोपहर 12 बजे रेलवे ट्रैक की ओर कूच किया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात होने के बावजूद किसान पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर रेलवे लाइन पर पहुंचने में कामयाब रहे और पंजाब व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए ट्रैक पर धरना दे दिया।
धरने को संबोधित करते हुए राज्य नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल और मनजीत सिंह नियाल ने कहा कि पंजाब में बढ़ते नशे, सरकारी तंत्र के दमन और किसानों-मजदूरों की जायज मांगों को लेकर राज्य में करीब 6 स्थानों पर ट्रेनों का आवागमन रोककर संघर्ष चलाया जा रहा है। किसान नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि जनता की वाजिब मांगों का समाधान करने के बजाय पंजाब सरकार दबाव बनाने का रास्ता अपना रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसान संगठन की प्रमुख मांगें
मक्का, मूंग, आलू, सरसों और बासमती की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) तय कर सरकारी खरीद की पक्की गारंटी दी जाए। गन्ने का भाव 550 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए और चीनी मिलों की तरफ बकाया तुरंत ब्याज सहित दिया जाए।
बिजली बिल 2025, बीज बिल 2025 और कोऑप्रेशन बिल 2026 के माध्यम से लाई गई लैंड पूलिंग स्कीम को तुरंत रद्द किया जाए। इसके अतिरिक्त, विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर फ्री ट्रेड एग्रीमैंट (एफ.टी.ए.) रद्द करने का प्रस्ताव पारित हो।
पुनर्गठन अधिनियम 1966 की धारा 78, 79 और 80 को रद्द कर पंजाब के पानी के अधिकार सुरक्षित किए जाएं। किसानों से जबरन जमीन छीनना बंद हो, काबिज किसानों को मालिकाना हक मिले और गेहूं की बुआई के लिए खाद (यूरिया व डी.ए.पी.) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, किसान आंदोलनों में शहीद या अपाहिज हुए किसानों के परिवारों को नौकरी व आर्थिक मुआवजा दिया जाए। शंभू व खनौरी बॉर्डर पर नुकसान हुए सामान की भरपाई हो, किसानों पर दर्ज मुकदमे व पराली जलाने के केस रद्द किए जाएं तथा बाढ़, ओलावृष्टि व आग से खराब हुई फसलों का पूरा मुआवजा मिले।
महिला नेताओं बलजीत कौर, गुरप्रीत कौर और अन्य किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक यह अनिश्चितकालीन संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा।
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