40 डिग्री पार तापमान... फिर भी नहीं बदला पंजाब के स्कूलों का समय, बच्चे गर्मी में बेहाल

punjabkesari.in Friday, Apr 24, 2026 - 07:03 PM (IST)

पंजाब डेस्क: इस बार गर्मी ने शुरू से ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट वेव की चेतावनी भी जारी की है। आसमान से बरसती आग और लगातार बढ़ती हीट वेव (गर्मी) का असर स्टूडेंट्स, खासकर छोटे बच्चों पर जल्दी पड़ता है। वहीं अगर कहर बरपा रही गर्मी में स्कूलों के समय की बात करें तो अभी तक पंजाब के स्कूलों के समय में बदलाव नहीं किया गया है। 

यूपी के बाद उत्तराखंड में बदला स्कूलों का समय

आपको बता दें कि, लगतार बढ़ती गर्मी में और हीटवेव के खतरे को देखते हुए यूपी में कुछ दिन पहले ही स्कूलों के समय में बदलाव किया जा चुकी है। ताकि बच्चों को तेज धूप और लू से बचाया जा सके।

UP के स्कूलों की टाइमिंग: जानकारी के मुताबिक यूपी में स्कूली का समय सुबह 7:30 से दोपहर 1:30 तक कर दिया है। इस दौरान छात्र सुबह 7:30 बजे से 12:30 बजे क स्कूल में रहेंगे और शिक्षक स्टाफ दोपहर 1:30 बजे क स्कूल में मौजूद रहेगा।

उत्तराखंड के स्कूलों की टाइमिंग: वहीं अगर उत्तराखंड के स्कूलों की बात करें तो वहां पर भी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में लू के बढ़ते कहर को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों का समय सुबह 6:45 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक कर दिया है। 

पंजाब के स्कूल के समय में नहीं हुआ बदलाव

लगातार बढ़ रही गर्मी के कारण लोगों का हाल बेहाल हो रखा है। कई जिलों का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है और मौसम विभाग ने हीट वेव की चेतावनी भी जारी की है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने पंजाब के स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में बच्चों को दोपहर के समय इतनी  गर्मी में घर पर आने पर मुश्किल हो रही है। 

पेरेंट्स स्कूलों का समय बदलने की कर रहे मांग

बढ़ती गर्मी और बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए, पेरेंट्स और ऑर्गनाइजेशन सरकार से स्कूलों का समय बदलने की मांग कर रहे हैं। पेरेंट्स का सुझाव है कि स्कूलों का समय सुबह 7 बजे से 11 बजे तक कर देना चाहिए। क्योंकि अब जब स्टूडेंट्स की स्कूलों से छुट्टी होती है, तो वह दिन का सबसे गर्म और तेज समय होता है, यानी चिलचिलाती दोपहर, जिससे स्टूडेंट्स की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। माता-पिता का कहना है कि बच्चों को दोपहर 2 बजे तक स्कूल में रखना उनकी जान जोखिम में डालने जैसा है।

इन मुश्किलों का करना पड़ रहा सामना 

शहर हो या ग्रामीण इलाका कई जगहों पर लंबे-लंबे बिजली के कट लगने शुरू हो गए हैं। ऐसे में कक्षाएं भट्ठी बन जाती है। ज़्यादातर सरकारी स्कूलों में जनरेटर न होने की वजह से बच्चे पसीने से तर-बतर होने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी समस्या पानी की है। बिजली जाते ही स्कूलों की मोटरें बंद हो जाती हैं, जिससे वाटर कूलर सिर्फ दिखावा बनकर रह जाते हैं और बच्चों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ज़्यादातर छात्र साइकिल से कई किलोमीटर का सफर करके स्कूल पहुंचते हैं। दोपहर में जब स्कूल बंद होता है, तो चिलचिलाती गर्मी में बच्चों को बहुत ज्यादा जलन होती है। धूप में साइकिल चलाकर घर लौटते समय बच्चों में बेहोशी, चक्कर आना और नाक में खून बहने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। 

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News Editor

Kamini

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