दुनिया के 26 करोड़ से अधिक लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित, पंजाब में भी हालात चिंताजनक

punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 12:39 PM (IST)

अमृतसर (दलजीत): वर्ल्ड अस्थमा दिवस के मौके पर सांस से जुड़ी गंभीर बीमारी अस्थमा को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। अस्थमा अब केवल एक आम बीमारी नहीं रह गई बल्कि यह पूरी दुनिया में एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर चुकी है। दुनिया भर में लगभग 26 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं जबकि हर साल करीब 4.5 लाख लोगों की मौत इसके कारण हो जाती है। खास बात है कि पंजाब भी इस बीमारी से बचा नहीं है, पंजाब में बड़ी तादाद में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है।

जानकारी के अनुसार भारत में इस बीमारी की स्थिति और भी चिंताजनक है। देश में लगभग 3.5 से 4 करोड़ लोग अस्थमा से जूझ रहे हैं, जोकि ग्लोबल आंकड़ों का बड़ा हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बढ़ता प्रदूषण, तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण इस बीमारी के फैलाव को और तेज कर रहे हैं। यदि पंजाब की बात करें तो यहां भी हालात चिंताजनक हैं। अनुमान के मुताबिक राज्य में 10 से 12 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर अमृतसर, लुधियाना और जालंधर जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले शहरों में यह समस्या और गंभीर हो चुकी है।

अस्थमा के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण वायु प्रदूषण माना जा रहा है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों की जहरीली गैसें, पराली जलाने से उठने वाला धुआं और घरों में मौजूद धूल-मिट्टी इस बीमारी को बढ़ाते हैं। इसके अलावा तंबाकू सेवन, पैसिव स्मोकिंग, मौसम में अचानक बदलाव और एलर्जी भी इसके प्रमुख कारण हैं। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार अस्थमा के दौरान मरीज की सांस नलियां सूज जाती हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। गंभीर स्थिति में अस्थमा का दौरा जानलेवा साबित हो सकता है। समय पर इलाज न मिलने या दवाइयों में लापरवाही के कारण मौत के मामले भी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि अस्थमा के लक्षण जैसे सांस फूलना, सीटी जैसी आवाज आना, छाती में जकड़न और लंबे समय तक खांसी को कभी नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी 

सरकारी छाती और टी.बी. रोग अस्पताल के सीनियर डॉक्टर विशाल वर्मा ने बताया कि अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है लेकिन सही इलाज और इनहेलर के नियमित उपयोग से मरीज आम जीवन जी सकते हैं। लोगों को अपनी दवाइयां बिना सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए।

बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है अस्थमा

सरकारी मेडिकल कालेज के चैस्ट एंड टी.बी. विभाग के सीनियर डॉक्टर संदीप महाजन के अनुसार बच्चों में अस्थमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को धूल, धुएं और ठंडे मौसम से बचाकर रखें और समय-समय पर जांच करवाएं।

वायु प्रदूषण और पराली जलाने से समस्या और गंभीर 

इंडियन मैडीकल एसोसिएशन के मुख्य प्रवक्ता और स्वास्थ्य विभाग के जिला टी.बी. अधिकारी रहे डॉक्टर नरेश चावला के अनुसार “पंजाब में वायु प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या अस्थमा को और गंभीर बना रही है। सरकार और लोगों को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा।”

बीमारी में लापरवाही और देरी मौतों को दे रही है न्यौता 

सरकारी छाती और टी.बी. विभाग के डॉक्टर तुषार बांसल के अनुसार अस्थमा से होने वाली मौतें ज्यादातर लापरवाही और देरी से इलाज के कारण होती हैं। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां और इलाज की सुविधा उपलब्ध है, जिसका लोगों को लाभ उठाना चाहिए।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Kalash

Related News