लुधियाना में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर भड़के शाही इमाम, दी चेतावनी

punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 05:37 PM (IST)

लुधियाना (राज): बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा महानगर में चल रही श्री हनुमंत कथा के मंच से दिए गए कथित बयानों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब के शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी सानी ने धीरेंद्र शास्त्री के बयानों पर बेहद कड़ा विरोध दर्ज करते हुए इसे पंजाब के सदियों पुराने आपसी सौहार्द, शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करार दिया है। शाही इमाम ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि धीरेंद्र शास्त्री अपनी विवादित टिप्पणियां फौरन वापस लें, अन्यथा उनके और कथा के आयोजकों के खिलाफ पुलिस में कानूनी केस दर्ज करवाया जाएगा।

शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम और औद्योगिक विकास में लुधियाना शहर का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म की कथा या धर्म प्रचार से किसी को कोई ऐतराज नहीं हो सकता। संविधान हर किसी को अपने धर्म का प्रचार करने की आजादी देता है, लेकिन धार्मिक मंचों का दुरुपयोग कर नफरत फैलाना, समाज को बांटना और इस्लाम धर्म पर आपत्तिजनक व अशोभनीय टिप्पणियां करना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे वे खुद हों या कोई अन्य धर्म प्रचारक, सभी का पहला कर्तव्य समाज में मोहब्बत, अमन और आपसी सांझ का संदेश देना है। 

पंजाब की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए शाही इमाम ने कहा कि यह धरती पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी की है, जिन्होंने हमेशा संवाद और सर्व-सांझीवालता की बात कही। उन्होंने कहा कि यह बाबा फरीद शकरगंज की भूमि है, जिनकी वाणी आज भी फिजाओं में मिठास घोलती है। इस धरती से दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, नबी खां, गनी खां, दीवान टोडरमल और हजरत साईं मियां मीर का अमर इतिहास जुड़ा हुआ है। साईं मियां मीर ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब की पावन नींव रखी थी और आज भी पंजाब के गांवों में हिंदू व सिख भाई मस्जिदों के निर्माण के लिए जमीनें दान करते हैं। ऐसी पवित्र और ऐतिहासिक धरती पर आकर नफरत का बीज बोना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री द्वारा श्रद्धालुओं को बार-बार 'लुधियाना के पागलों' कहकर संबोधित करने पर भी शाही इमाम ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि लुधियाना के लोग बेहद सूझवान, संजीदा, इज्जतदार और मिलनसार हैं। कथावाचक उन्हें पागल समझने की भूल न करें। लुधियाना के लोग हर धर्म और आस्था का सम्मान करना जानते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 1947 के खूनी बंटवारे का दौर भी यहां के निवासियों के आपसी प्रेम और कौमी एकता को खत्म नहीं कर सका था, तो आज नफरत फैलाने वाले इसे क्या तोड़ेंगे। कथावाचक द्वारा चीन को लेकर की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए शाही इमाम ने कहा कि जिस डिजिटल तकनीक और आधुनिक कैमरों के जरिए उनकी बात करोड़ों लोगों तक पहुंच रही है, वह भी चीन की तकनीक है। उन्होंने कहा कि भारत और विशेषकर औद्योगिक शहर लुधियाना का चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारिक संबंध है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय और पड़ोसी देशों के मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी करना बचकाना है। शाही इमाम ने तंज कसते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को दुबई के अब्दुल्ला से खुशबू आती है, लेकिन पंजाब के अब्दुल्ला को लेकर वे नफरत भरी बातें करते हैं; यह दोहरा मापदंड क्यों और किसके इशारे पर अपनाया जा रहा है?

शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी ने कहा कि यदि धीरेंद्र शास्त्री ने अपने विवादित बोल वापस नहीं लिए, तो पंजाब के आपसी भाईचारे की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और लोकतांत्रिक कदम उठाया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया कि कथावाचक और आयोजन समिति के खिलाफ पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज करवाया जाएगा। इसके साथ ही, पंजाब की सदियों पुरानी भाईचारक सांझ को अटूट बनाए रखने के लिए जल्द ही सभी धर्मों—हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों की एक विशेष संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी।

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News Editor

Kalash

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