शेर-ए-पंजाब की शाही बारादरी में तोड़फोड़ का मामला गरमाया, आरोपियों पर हो कड़ी कार्रवाई

punjabkesari.in Saturday, Apr 25, 2026 - 03:52 PM (IST)

गुरदासपुर,दीनानगर(विनोद/गोराया): बीते दिनों दीनानगर में शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की ऐतिहासिक शाही बारादरी में तोडफ़ोड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने पर संगत में रोष की लहर है। विरासत मंच बटाला के चेयरमैन एडवोकेट एच.एस. मांगट, प्रधान बलदेव सिंह रंधावा, जनरल सेक्रेटरी इंदरजीत सिंह हरपुरा और मंच के सभी पदाधिकारियों ने पंजाब सरकार और जिला प्रशासन गुरदासपुर से मांग की है कि इस विरासत में तोडफ़ोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिसे पंजाब सरकार के टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट ने सुरक्षित घोषित किया है और इस इमारत को और नुकसान होने से तुरंत रोका जाए।

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विरासत मंच के प्रधान बलदेव सिंह ने कहा कि पिछले दिनों कुछ शरारती लोगों ने ऐतिहासिक बारादरी में तोड़फोड़ करने और उस पर गैर-कानूनी कब्जा करने की कोशिश की थी। इस बारे में विरासत मंच की तरफ से डी.एस.पी. दीनानगर को एक लिखित शिकायत भी दी गई थी ताकि बारांदरी को नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि शरारती तत्वों ने बारादरी के बाहर रेत और बजरी के ढेर भी लगा दिए हैं ताकि वे बारादरी पर लैंटर डालकर उस पर अवैध कब्जा कर सकें। उन्होंने कहा कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो चिंता की बात है।

विरासत मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि इस ऐतिहासिक बारादरी को पंजाब सरकार ने सुरक्षित इमारत घोषित किया है और कोई भी व्यक्ति इस यादगार पर कब्जा नहीं कर सकता और न ही अपने लेवल पर इस पर लैंटर लगाकर इसकी विरासती खूबसूरती को खराब कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस ऐतिहासिक इमारत पर कब्जे के इरादे से की जा रही तोड़फोड़ को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही हेरिटेज फोरम के सभी सदस्यों ने पंजाब सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक बारादरी को बनाए रखा जाए।

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शाही बारादरी के ऐतिहासिक बैकग्राउंड के बारे में जानकारी देते हुए हेरिटेज फोरम के जनरल सेक्रेटरी इंदरजीत सिंह हरपुरा ने कहा कि यह बारादरी महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाई थी और वह हर साल गर्मियों के महीने अक्सर दीनानगर में बिताते थे। दीनानगर में ही सरकार खालसा का एक बड़ा मिलिट्री कैंप भी था। उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह ने दीनानगर में कई ऐतिहासिक दरबार लगाए। इसीलिए इसे सरकार खालसा जी की गर्मियों की राजधानी भी कहा जाता था।

इंदरजीत सिंह हरपुरा ने कहा कि दीनानगर की शाही बारादरी में लाहौर दरबार, ब्रिटिश सरकार और अफगानिस्तान के राजा शाह शुजा के बीच एक त्रिपक्षीय संधि पर साइन किए गए थे। इसके अलावा कश्मीर को जीतने की रणनीति भी यहीं बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी लेखक विलियम जी. ओसबोर्न की किताब ‘महाराजा रणजीत सिंह कोर्ट एंड कैंपस’ में दीनानगर के शाही दरबार की शान के बारे में अच्छे से बताया गया है।

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इंदरजीत सिंह हरपुरा ने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने साल 2010 में इस ऐतिहासिक बारांदरी को सिक्योरिटी बिल्डिंग का दर्जा दिया था और बारादरी के रेनोवेशन के लिए सरकार की तरफ से 1.60 करोड़ रुपये का टेंडर भी निकाला गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार को इस हेरिटेज बिल्डिंग के बचाव पर ध्यान देना चाहिए। इस मौके पर हेरिटेज फोरम के पदाधिकारी कुलविंदर सिंह लाडी जस्सल, शमशेर सिंह मल्ही, कोषाध्यक्ष सुखदेव सिंह फैजपुरा, प्रिंसपाल सिंह चट्ठा, शेरे पंजाब सिंह काहलों, हरविंदर सिंह हरपुरा, वैबीजोत सिंह काहलों, वरिंदर सिंह और दूसरे पदाधिकारी भी मौजूद थे।

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Content Writer

Sunita sarangal

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