कूड़ा प्लांट विवाद के बीच Punjab में प्रदूषण का मुद्दा गरमाया, पंजाब सरकार से भी स्वास्थ्य सर्वे की मांग

punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 04:10 PM (IST)

रूपनगर(विजय): हिमाचल प्रदेश के माजरा कूड़ा प्लांट को लेकर जारी विवाद अब पंजाब तक पहुंच चुका है। नालागढ़ में हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सोलन के उपायुक्त ने प्रभावित इलाकों का तुरंत मेडिकल सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले के बाद पंजाब के जल स्रोतों और पर्यावरण सुरक्षा पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। संघर्ष समिति के नेता खुशविंदर सिंह और पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हिमाचल प्रशासन जनता की स्वास्थ्य चिंताओं को गंभीरता से ले सकता है, तो पंजाब सरकार सतलुज और सरहिंद नहर के बढ़ते प्रदूषण पर चुप क्यों है?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्रों से आ रहे कैमिकल और कचरे के कारण रूपनगर की सरहिंद नहर और सतलुज दरिया का पानी दूषित हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब सरकार और रूपनगर जिला प्रशासन को भी प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वास्थ्य एवं वैज्ञानिक सर्वे कराना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, नेताओं ने चमकौर साहिब के भैरो माजरा के पास सरहिंद नहर में कचरा फंसने और नहर के क्षतिग्रस्त होने की आशंका पर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। उनका कहना है कि जन सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन को जमीनी निरीक्षण कर वास्तविक तथ्य सामने रखने चाहिए।

दूसरी ओर, सोलन प्रशासन ने प्लांट के पानी के निरंतर सैंपल टेस्ट, सी.सी.टी.वी. से कचरा वाहनों की निगरानी और प्रक्रिया में संघर्ष समिति को शामिल करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, माजरा संघर्ष समिति और स्थानीय महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरे हिमाचल का कचरा माजरा में डालना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्लांट से जुड़ी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट और अन्य स्वीकृतियों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक यह प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

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Content Writer

Sunita sarangal

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