तरुण चुघ ने PPSC घोटाले की CBI जांच की उठाई मांग, राज्यपाल  को लिखा पत्र

punjabkesari.in Thursday, Nov 05, 2026 - 07:10 PM (IST)

पंजाब डेस्क: भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब PCS मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पंजाब के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। चुघ ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच करवाने, चयन प्रक्रिया तत्काल रोकने और जांच पूरी होने तक सभी संबंधित रिकॉर्ड एवं साक्ष्यों को सुरक्षित करने की मांग की है।

तरुण चुघ ने कहा कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल की बिना पैसे और बिना सिफारिश नौकरी देने का दावा करने वाली सरकार आज पंजाब की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर रही है। जिस मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार के सपने दिखाकर सत्ता हासिल की, उसी के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक, भर्ती में धांधली और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। भगवंत मान को बताना चाहिए कि आखिर पंजाब के युवाओं के साथ यह अन्याय कब तक चलता रहेगा?

चुघ ने कहा कि 4 नवंबर की देर रात घोषित PPSC PCS मुख्य परीक्षा के परिणाम ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा दी ही नहीं, उनके रोल नंबर तक सफल अभ्यर्थियों की सूची में दिखाई दे रहे हैं। एक ही परीक्षा केंद्र से 24.21 प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन, 86 उम्मीदवारों के लगातार 3 या 4 रोल नंबरों के समूह में शॉर्टलिस्ट होने और कुछ परीक्षा कक्षों से 10 से 11 उम्मीदवारों के चयन जैसे गंभीर सवाल सामने आए हैं। 331 विज्ञापित पदों के मुकाबले केवल 751 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं, जबकि निर्धारित मानदंड के अनुसार 3 गुना उम्मीदवारों को बुलाए जाने की मांग की जा रही है। क्या यह महज संयोग है या फिर रोल नंबर आवंटन से लेकर परीक्षा केंद्र और परिणाम तक किसी विशेष व्यवस्था के तहत अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया गया? इन सभी सवालों का जवाब भगवंत मान सरकार को देना होगा।

तरुण चुघ ने कहा कि भगवंत मान की सरकार ने पंजाब में योग्यता और मेहनत को पीछे धकेलकर सिफारिश और कथित सेटिंग की आशंकाओं को जन्म दिया है। पंजाब का युवा दिन-रात मेहनत करता है, परिवार अपनी जमीन, जमा-पूंजी और भविष्य की उम्मीदें उसकी पढ़ाई पर लगाता है, लेकिन जब परिणाम आता है तो उसे पता चलता है कि परीक्षा में शामिल नहीं होने वाले उम्मीदवारों के चयन तक के आरोप लग रहे हैं। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पंजाब के युवाओं के विश्वास पर सीधा हमला है।

चुघ ने कहा कि PPSC का मामला कोई अकेली घटना नहीं है। PSSSB ग्रुप-B भर्ती परीक्षा में शीर्ष 100 अभ्यर्थियों में 22 उम्मीदवारों के बठिंडा से होने, कुछ उम्मीदवारों के पारिवारिक संबंधों और मेरिट सूची में कथित फर्जी प्रविष्टियों को लेकर गंभीर सवाल उठे। फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में पेन कैमरा, ब्लूटूथ डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हाई-टेक नकल गिरोह के आरोप सामने आए। इस मामले में गिरफ्तारियां हुईं और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 454 पदों की चयन प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए जांच CBI को सौंपने के संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा। नायब तहसीलदार, कृषि विकास अधिकारी, PSEB की अंग्रेजी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी लगातार विवाद सामने आए हैं। आखिर कितने भर्ती घोटालों और पेपर लीक के आरोपों के बाद भगवंत मान अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे?

तरुण चुघ ने कहा कि जो भगवंत मान विपक्ष में रहते हुए हर परीक्षा विवाद पर दूसरों से इस्तीफा मांगते थे, आज अपने ही राज्य में लगातार उठ रहे सवालों पर चुप्पी साधे बैठे हैं। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि जब उनके शासन में बार-बार भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, तो अब तक किसी बड़े राजनीतिक पदाधिकारी ने नैतिक जिम्मेदारी क्यों नहीं ली? क्या पंजाब के युवाओं के भविष्य की कोई कीमत नहीं है? क्या मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी सरकार को ईमानदार बताने तक सीमित रह गई है?

चुघ ने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच पंजाब पुलिस या राज्य सरकार के नियंत्रण वाली एजेंसियों से करवाना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि सवाल स्वयं सरकार के कार्यकाल और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि PPSC परीक्षा के सभी उत्तर पत्र, उपस्थिति रजिस्टर, CCTV फुटेज, डिजिटल लॉग, रोल नंबर आवंटन, परीक्षा केंद्रों की जानकारी और मूल्यांकन रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित किए जाएं। जांच पूरी होने तक साक्षात्कार प्रक्रिया रोकी जाए तथा PSSSB, फार्मेसी ऑफिसर, नायब तहसीलदार और अन्य विवादित भर्ती परीक्षाओं की भी स्वतंत्र जांच करवाई जाए।

तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पंजाब के युवाओं के साथ इतना बड़ा विश्वासघात होने के बाद मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। भगवंत मान को कुर्सी से ज्यादा पंजाब के युवाओं के भविष्य की चिंता करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी की सरकार ने रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन आज युवाओं को अपने ही राज्य की भर्ती व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को अब जुमले नहीं, न्याय चाहिए। भाजपा इस लड़ाई में प्रदेश के हर उस अभ्यर्थी के साथ खड़ी है जिसकी मेहनत और योग्यता के साथ अन्याय होने की आशंका है। इस पूरे मामले की CBI जांच होनी चाहिए, दोषियों को जेल भेजा जाना चाहिए और भगवंत मान को पंजाब के युवाओं के प्रति जवाबदेही स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

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News Editor

Kamini

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