मान सरकार का पुराना डिजिटल ढांचा नशा तस्करों पर शिकंजा कसने की सबसे बड़ी चुनौती: तरुण चुघ
punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 07:27 PM (IST)
पंजाब डेस्क : पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल सीमाओं, गांवों और शहरों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने खुलासा किया है कि पंजाब में सक्रिय संगठित नशा तस्करी गिरोह डिजिटल तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहे हैं।
संसद में प्राप्त उत्तर पर प्रतिक्रिया देते हुए तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब का ड्रग माफिया तेजी से डिजिटल हो चुका है, लेकिन भगवंत मान सरकार का तंत्र अभी भी पुराने तौर-तरीकों से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब तस्कर एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं, तब पंजाब सरकार का डिजिटल निगरानी ढांचा इस चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से आधुनिक नहीं दिखता। चुघ ने कहा कि संसद में केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी इस बात का प्रमाण है कि पंजाब में नशा तस्करी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब नशा तस्कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचार, भर्ती, भुगतान, लोकेशन शेयरिंग और नशे की खेपों के आवागमन का समन्वय कर रहे हैं। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, वीपीएन, वर्चुअल नंबर और फर्जी केवाईसी आधारित सिम कार्ड का उपयोग कर अपनी पहचान और वित्तीय लेन-देन को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।
तरुण चुघ ने कहा कि, "ड्रग माफिया ने खुद को आधुनिक बना लिया है, लेकिन पंजाब सरकार का डिजिटल ढांचा अभी भी पुराना और आउटडेटेड नजर आता है। जब अपराधी एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, डार्कनेट नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तब सरकार की प्रतिक्रिया भी तकनीक आधारित, आधुनिक और इंटेलिजेंस संचालित होनी चाहिए। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच में पंजाब में सक्रिय संगठित नशा तस्करी गिरोहों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग का पता चला है। उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में जेलों में बंद तस्कर मोबाइल फोन के माध्यम से जेल के बाहर मौजूद अपने सहयोगियों के जरिए नशा तस्करी गतिविधियों का संचालन करते पाए गए हैं। मंत्री ने संसद को यह भी बताया कि तस्कर अब जीपीएस आधारित ड्रोन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) तंत्र को मजबूत किया है, विभिन्न एजेंसियों के बीच खुफिया सूचना साझाकरण को बढ़ाया है तथा बड़े नशा तस्करी और नार्को-टेरर मामलों की निगरानी के लिए संयुक्त समन्वय समितियों का गठन किया है। साथ ही, पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान और समन्वय को मजबूत करने के लिए एनसीबी ने अमृतसर में जोनल और रीजनल कार्यालय स्थापित किए हैं। केंद्र सरकार ने डार्कनेट आधारित नशा तस्करी, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन और तकनीक आधारित अपराधों की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया है। चुघ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नशे और नार्को-टेरर के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है तथा संगठित नशा तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए संस्थागत, तकनीकी और प्रवर्तन क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए मान सरकार को भी जमीनी कार्रवाई के साथ-साथ आधुनिक साइबर निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और केंद्रीय एजेंसियों के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस समन्वय को प्राथमिकता देनी होगी। चुघ ने कहा, "नशे के खिलाफ लड़ाई अब पुराने औजारों से नहीं जीती जा सकती। आधुनिक अपराधियों से लड़ने के लिए पंजाब को आधुनिक तकनीकी सुरक्षा कवच तैयार करना ही होगा।"
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