पियक्कड़ों के लिए चिंताजनक खबर! शराब को लेकर सामने आई हैरान करने वाली Report

punjabkesari.in Monday, Aug 17, 2026 - 12:28 PM (IST)

अमृतसर (इन्द्रजीत): अवैध शराब निर्माण और बिक्री से जुड़े सिंडिकेट में एक नया और चिंताजनक ट्रैंड देखने को मिल रहा है। शराब माफिया उपभोक्ताओं के बीच यह भ्रांति फैलाते हैं कि नाले के "खारे" पानी से तैयार शराब की गुणवत्ता, नशा और सरूर बेहद खास और अलग होता है। हालांकि, यह केवल एक झूठा प्रचार है। यहां तक कि इस शराब से पुरानी खुजली ठीक करने का भी दावा किया जाता है। अमृतसर आबकारी रेंज के अंतर्गत आते अजनाला क्षेत्र में एक सकी नाला है। इसके पानी का इस्तेमाल करके शराब के कई माफिया वर्षों से शराब का काम कर रहे हैं।

बता दें कि बड़े स्तर पर अवैध शराब बनाने हेतु भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए निर्माता अक्सर आसपास बहने वाले गंदे नालों का सहारा लेते हैं। हालांकि कीचड़ नीचे बैठ जाने के कारण यह पानी मैला नहीं दिखता, लेकिन इसमें अलग तरह का "रंग और दुर्गंध" मौजूद होती है। सिर्फ पानी की उपलब्धता आसान होने के कारण इस दूषित पानी का इस्तेमाल कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है और अवैध कमाई की जा रही है। हालांकि इन क्षेत्रों में लंबे समय तक एक महिला आबकारी इंस्पैक्टर जो अब तरक्की पाकर बदल चुकी हैं, ने पिछले 6/7 वर्षों से काफी बरामदगी की थी लेकिन इस गोरखधंधे को पूरी तरह से बंद नहीं करवाया जा सका, नतीजतन सिलसिला जारी है।

विशिष्ट 'टेस्ट' के चलते फंसते हैं उपभोक्ता
विशेषज्ञों के अनुसार दूषित और कैमिकल युक्त पानी से तैयार इस शराब का स्वाद और नशे की लत उपभोक्ताओं को आसानी से अपनी चपेट में ले लेती है। नशा करने वाले लोग इसे एक विशिष्ट 'टेस्ट' मान बैठते हैं, जबकि वास्तव में यह शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हो रहा है। क्योंकि नाले के पानी में हर तरह की गंदगी और वेस्ट चीज बहा दी जाती है जिसमें जानवरों का मल, मरे हुए जानवरों की हड्डियां इत्यादि भी शामिल होती हैं।

पहाड़ी इलाकों का जड़ी-बूटियों वाला बताते हैं पानी
अवैध शराब के काले कारोबार में लगे तस्कर लोगों की जान से खिलवाड़ करते हुए तरह-तरह के भ्रम फैला रहे हैं। नाले के दूषित पानी से बनाई जा रही शराब को लेकर यह झूठा दावा किया जा रहा है कि यह पानी पहाड़ी इलाकों की "जड़ी-बूटियों" से होकर गुजरता है, जिससे शराब की गुणवत्ता बेहतर होती है। यहां तक कि ऐसे पानी से खुजली ठीक होने की बात भी कही जाती है। हालांकि विशेषज्ञों और जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यह केवल एक छलावा है। दरअसल, सड़े हुए ठहरे पानी और नाले की गंदगी की तीखी बदबू शराब की अपनी गंध में पूरी तरह घुल-मिल जाती है, जिससे आम इंसान के लिए इस गंदगी की पहचान कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। इसी भ्रम और नशे की लत के जाल में फंसकर लोग इस गंदी शराब को पी रहे हैं, जो सीधे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर हमला कर रहा है।


 


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Vatika

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