PSPCL को दिवालिया बनाने की साजिश, सुनील जाखड़ का पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप
punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 11:20 AM (IST)
चंडीगढ़/जालंधर (हरिश्चंद्र, गुलशन): पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने पंजाब सरकार पर पंजाब राज्य बिजली निगम (पी.एस.पी.सी.एल.) को आर्थिक रूप से दिवालिया करने की साजिश का आरोप लगाया है। प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रैस कान्फ्रैंस के दौरान जाखड़ ने बताया कि किस तरह सरकार कागजों में ही बिजली निगम को घाटे से मुनाफे में दिखाकर पंजाब के लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि वास्तव में सरकार राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले इस निगम को आर्थिक रूप से कमजोर करके उसे निजीकरण की ओर धकेलने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि 28 नवम्बर, 2025 को पंजाब राज्य बिजली निगम ने पंजाब राज्य बिजली रैगुलेटरी कमीशन के पास अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए.आर.आर.) याचिका दाखिल की थी, जिसे नियमों के अनुसार हर साल 30 नवम्बर से पहले दाखिल करना होता है। इस याचिका में निगम ने 1715 करोड़ रुपए का घाटा दिखाया था लेकिन 4 फरवरी, 2026 को पहली बार बिजली निगम ने एक संशोधित याचिका (रिविजन पिटीशन) दाखिल की, जिसे हैरानीजनक ढंग से नियामक आयोग ने स्वीकार भी कर लिया।
इस संशोधित याचिका में निगम ने दावा किया कि अब वह 7852 करोड़ रुपए के सरप्लस में है और उसे 19,600 करोड़ रुपए की जगह केवल 15,200 करोड़ रुपए की बिजली सब्सिडी की जरूरत होगी। इसके अलावा सरकार द्वारा दी गई 3581.95 करोड़ रुपए की लॉस फंडिंग को भी नियमों के खिलाफ जाकर निगम ने अपनी वित्तीय पुस्तकों में आय के रूप में दिखाया, जो पूरी तरह गलत है।
जाखड़ ने कहा कि इसी संशोधित याचिका के आधार पर बिजली दरों में कमी का दिखावा किया गया है, जबकि वास्तव में यह लोगों को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा कमी 300 यूनिट तक की घरेलू खपत में दिखाई गई है, जबकि इतनी बिजली तो पहले ही मुफ्त मिलती है। इसका मतलब है कि इस कमी का लाभ जनता को नहीं मिलेगा, बल्कि सरकार को बिजली निगम को दी जाने वाली सब्सिडी कम देनी पड़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह बिजली निगम चल पाएगा।
जाखड़ ने कहा कि किसी भी तरीके से वास्तविक लागत और खर्च को कम करके नहीं दिखाया जा सकता। बिजली निगम की हालत बेहद चिंताजनक है और सरकार पर 31 मार्च 2025 तक की 11,109.70 करोड़ रुपए की सब्सिडी बकाया है। इसी तरह 31 दिसम्बर 2025 तक चालू वित्त वर्ष के 4300 करोड़ रुपए और सरकारी विभागों के 2600 करोड़ रुपए भी बकाया हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कागजों में हेरफेर करके बिजली निगम को एक साजिश के तहत बड़े घाटे की ओर धकेला जा रहा है।
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