सिद्धू के कारवां को रोकने के लिए कैप्टन धड़े की अगली ‘चाल’ पर सभी की नजरें

7/21/2021 9:57:11 AM

पठानकोट (शारदा): पंजाब के विधानसभा चुनावों को कुछ माह का समय ही शेष रह गया है। पंजाब में सभी राजनीतिक दल और प्रशासन चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त हो चुके हैं परंतु गत 2 माह से पंजाब की जनता कैप्टन अमरेन्द्र एवं नवजोत सिद्धू के बीच राजनीतिक द्वंद्व देख रही है। 

यह सभी राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अध्ययन का केन्द्र बन गया है कि हाईकमान ने एक प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए कैसी प्रक्रिया अपनाई। 3 दशकों से पंजाब कांग्रेस की राजनीति के एकमात्र सशक्त नेता कैप्टन अमरेन्द्र सिंह को हाईकमान द्वारा गठित 3 सदस्यीय कमेटी के पास बार-बार जाकर अपना स्पष्टीकरण देना पड़ा। इससे कुछ बातें साफ होनी शुरू हो गई थीं कि हाईकमान की सोच किस ओर जा रही है।  सिद्धू धड़े ने 2 माह पहले ही कह दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष का पद उन्हें ही मिलेगा। 2 माह तक उठा-पटक होती रही। जट्ट-सिख व हिन्दू-दलित को लेकर एक भारी भरकम कैम्पेन चली जो अंतत: पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर हैरान हैं कि कैप्टन धड़ा हाईकमान की नब्ज टटोलने में असफल क्यों रहा। धड़े के सभी मंत्री, नेतागण, विधायक और अंतत: सांसदों द्वारा जोर लगाने के बावजूद राष्ट्रीय नेतृत्व ने जट्ट सिख मुख्यमंत्री होने के बावजूद जट्ट सिख प्रधान लगाकर अपनी भविष्य की राजनीतिक योजनाओं का संदेश दे दिया। अब गांधी परिवार का वर्दहस्त प्राप्त नवजोत सिद्धू के कारवां को रोकने के लिए कैप्टन धड़ा क्या राजनीतिक चाल चलेगा, उस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर पंजाब में इस राजनीति के चलते विकास पर ब्रेक लगी हुई है और हाईकमान के इस निर्णय के बाद अफसरशाही ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है।


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Content Writer

Vatika

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