गुरदासपुर के PAU शोध केंद्र में ऑटोमैटिक मौसम स्टेशन शुरू, किसानों को मिलेगी मौसम की सटीक जानकारी
punjabkesari.in Wednesday, Oct 28, 2026 - 09:20 PM (IST)
गुरदासपुर (हरमन): बदलते मौसम और बढ़ती मौसमी अनिश्चितता के मद्देनजर किसानों को सटीक एवं समय पर मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के क्षेत्रीय शोध केंद्र, गुरदासपुर में पूरी तरह ऑटोमैटिक मौसम स्टेशन शुरू किया गया है। इस आधुनिक सुविधा के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मौसम के विभिन्न मापदंडों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। इससे मौसम के पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने और किसानों को फसलों की देखभाल संबंधी वैज्ञानिक सलाह देने में मदद मिलेगी।
पीएयू के वाइस चांसलर सुखजीत पाल सिंह ने बताया कि नया ऑटोमैटिक मौसम स्टेशन तापमान, हवा में नमी, हवा की गति, सूर्य की किरणों, जमीन के तापमान और बारिश से संबंधित आंकड़े रियल टाइम में दर्ज करेगा। इस सुविधा के माध्यम से मौसम से जुड़े जटिल आंकड़ों को किसानों के लिए सरल और व्यावहारिक सलाह में बदलने में मदद मिलेगी, ताकि वे खेती से जुड़े कार्यों के संबंध में सही समय पर निर्णय ले सकें।
उन्होंने बताया कि मौसम संबंधी अग्रिम जानकारी मिलने से किसान बारिश की संभावना होने पर कीटनाशकों का छिड़काव और सिंचाई उचित समय तक टाल सकते हैं। इसी तरह, यदि खेत में पहले से पर्याप्त नमी मौजूद हो तो सिंचाई की जरूरत का सही आकलन करके पानी की अनावश्यक खपत कम की जा सकती है।
पीएयू के डायरेक्टर रिसर्च डॉ. ए.एस. ढट्ट ने बताया कि इस मौसम स्टेशन से प्राप्त स्थानीय मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय शोध कार्यों, खेतों में किए जाने वाले परीक्षणों और नई बीज किस्मों की जांच के लिए किया जाएगा। इससे गुरदासपुर क्षेत्र की वास्तविक मौसमी परिस्थितियों के अनुसार फसलों की विभिन्न किस्मों का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी।
पीएयू के डायरेक्टर एक्सटेंशन एजुकेशन डॉ. एम.एस. भुल्लर ने बताया कि स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल साप्ताहिक जिला स्तरीय कृषि सलाहों में किया जाएगा। इससे किसानों को फसलों की बिजाई, सिंचाई, खादों के इस्तेमाल और बीमारियों की रोकथाम के लिए उचित समय निर्धारित करने में सहायता मिलेगी।
क्षेत्रीय शोध केंद्र, गुरदासपुर के डायरेक्टर डॉ. हरपाल सिंह रंधावा ने बताया कि इस स्टेशन का एक प्रमुख लाभ फसलों को प्रभावित करने वाली बीमारियों और कीटों के हमलों की निगरानी को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि गेहूं में पीली कुंगी जैसी बीमारियों के फैलाव में तापमान और नमी जैसे मौसमी कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन मापदंडों की लगातार निगरानी से बीमारी के अनुकूल मौसम की पहचान करने और समय रहते रोकथाम के उपाय करने में मदद मिल सकती है।
इस प्रकार, पीएयू के क्षेत्रीय शोध केंद्र में शुरू किया गया ऑटोमैटिक मौसम स्टेशन स्थानीय स्तर पर मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ-साथ कृषि अनुसंधान और किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।

