‘शीश महल’ पर खर्चे की कैग रिपोर्ट ने खोली ईमानदार आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो केजरीवाल की पोल: परगट सिंह

punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 07:34 PM (IST)

पंजाब डेस्क: पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने कहा कि खुद को ईमानदार बताने वाली आम आदमी पार्टी और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की पोल कैग रिपोर्ट ने खोल दी है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व आवास 06, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित सरकारी बंगले, यानी ‘शीश महल’ के नवीनीकरण में भारी लागत वृद्धि का खुलासा किया है। यह भी सामने आया है कि काम पहले कराया गया और बिल बाद में पास किए गए।

ऑडिट में सामने आया है कि इस परियोजना की प्रारंभिक स्वीकृत राशि ₹9.59 करोड़ थी, जबकि नवीनीकरण की कुल लागत ₹33.66 करोड़ रही, जो 342% अधिक है। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने के दुरुपयोग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी केजरीवाल के लिए तैयार करवाए गए सरकारी बंगले की कैग जांच होनी चाहिए। वह बंगला भी चर्चा में रहा है और उसमें भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, जिसका खुलासा होना चाहिए ताकि सरकारी पैसे की बर्बादी का पता लगाया जा सके।

परगट सिंह ने कहा कि कैग की रिपोर्ट में यह उजागर हो चुका है कि किस तरह अरविंद केजरीवाल ने सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। मुख्यमंत्री रहते हुए वे हर तरह की सुविधाओं का लाभ उठाने में आगे रहे। उन्होंने कहा कि यही केजरीवाल हैं, जो दिल्ली में सत्ता संभालने से पहले वीआईपी कल्चर का पुरजोर विरोध करते थे और सरकारी बंगले में रहने के खिलाफ थे। वे कहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री दो कमरों के निजी मकान में रहेंगे, लेकिन सत्ता संभालते ही उनका रुख बदल गया और वे सरकारी खर्च पर खुद और परिवार को सुविधाएं देने में जुट गए।

उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट के अनुसार ‘शीश महल’ यानी सरकारी बंगले पर लगभग ₹18.88 करोड़ उच्च गुणवत्ता वाले स्पेसिफिकेशन, कलात्मक, प्राचीन और सजावटी वस्तुओं पर ही खर्च किए गए। कैग ने सार्वजनिक धन के गैर-आवश्यक उपयोग पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी कमियों को भी उजागर किया गया है, जिनमें ₹9.34 करोड़ की पश्च-स्वीकृतियां (पोस्ट-फैक्टो अप्रूवल) और स्टाफ क्वार्टर व अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवंटित धन का पुनर्नियोजन शामिल है। ऑडिट में वित्तीय नियंत्रण और स्वीकृत बजट के पालन में गंभीर अंतर को रेखांकित किया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी नेताओं ने दिल्ली सरकार से खर्च और स्वीकृति प्रक्रियाओं को लेकर पूरी जवाबदेही और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। इन निष्कर्षों ने उच्च-प्रोफाइल सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुशासन को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के बाद सार्वजनिक क्षेत्र में सरकारी खर्च की समीक्षा और कड़ी निगरानी की मांग बढ़ेगी तथा वित्तीय नियंत्रण और मॉनिटरिंग तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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Content Editor

VANSH Sharma

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