Ludhiana : कोर्ट में अपने ही कर्मचारियों को नहीं पहचान पा रही पुलिस, जानें क्या है पूरा मामला
punjabkesari.in Sunday, Jan 18, 2026 - 02:05 PM (IST)
लुधियाना (गीतांजलि) : लॉटरी कारोबारी सुभाष केट्टी द्वारा सामने लाए गए पुलिस रिश्वत घोटाले के मामले में अब तक पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। कथित वीडियो में कैद पुलिस कर्मचारियों की पहचान पांच साल बाद भी नहीं हो पाई है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश अमरिंदर सिंह शेरगिल ने इस देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस फोर्स को अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी का काम सौंपा गया है, वह अपने ही कर्मियों की पहचान में नाकाम है।
सुनवाई के दौरान थाना डिवीजन नंबर 3 के इंस्पेक्टर नरदेव सिंह और ACP सेंट्रल अनिल कुमार भनोट कोर्ट में पेश हुए। हालांकि, उन्होंने वीडियो में दिख रहे कर्मियों की पहचान के लिए और समय मांगा। यह लगातार तीसरी सुनवाई थी जिसमें नए अधिकारियों ने वही बहाना दोहराया।
कोर्ट ने पुलिस को 28 वीडियो क्लिपों में दिख रहे कर्मियों की पहचान जल्द पूरी करने का आदेश दिया और कहा कि विफल रहने पर विभाग को अपनी अक्षमता पर औपचारिक रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने साथ ही पंजाब के मुख्य सचिव को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का पत्र भेजने का निर्देश भी दिया।
मामला 2019-2020 का है, जब सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि लॉटरी विक्रेताओं से कुछ पुलिस कर्मी खुलकर रिश्वत ले रहे थे। मार्च 2020 में हाईकोर्ट में केस दर्ज हुआ। अब तक 11 अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज और 10 के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए जा चुके हैं। सुभाष केट्टी के अनुसार, स्टिंग ऑपरेशन में कुल 28 पुलिस कर्मी कैमरे में कैद हुए थे। इस मामले में चयनात्मक कार्रवाई और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
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