मोदी सरकार बादलों को बेअदबी मामले में बचा नहीं पाएगी: कांग्रेस

7/12/2020 6:36:11 PM

चंडीगढ़ः पंजाब कांग्रेस ने आज कहा कि धार्मिक बेअदबी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाकर नरेंद्र मोदी सरकार बादल परिवार के सदस्यों को बचा नहीं पायेगी। छह मंत्रियों सुखजिंदर रंधावा, बलबीर सिद्धू, गुरप्रीत कांगड़, भरत भूषण आशु और अरुणा चौधरी ने आज यहां जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि बेअदबी घटनाओं में पंजाब पुलिस की जांच को हर हालत में निष्कर्ष पर पहुंचाकर दोषियों को सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सीबीआई के जरिए इस जांच को ‘रोककर‘ बादल परिवार को बचाने और राजनीति में फिर से बहाल करवाने में बिल्कुल भी सफल नहीं हो सकेगी। 

मंत्रियों ने कहा कि लोगों की अदालत में यह सिद्ध हो चुका है कि बेअदबी की घटनाओं के लिए उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी दोषी हैं। उन्होंने कहा कि अब मामला इन आरोपों को कानून की अदालत में सिद्ध करने का है जिसके लिए जरूरी सबूत इकठ्ठा करने के लिए पंजाब पुलिस बारीकी के साथ जांच कर रही है। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि बादलों को बचाने के लिए मोदी सरकार सीबीआई को इस्तेमाल करके पंजाब पुलिस की की तरफ से की जा रही जांच को रोकना चाहती है, जबकि राज्य पुलिस ने काफी मेहनत के साथ जांच कर उन व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख के कहने पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र सरूपों की बेअदबी करने का अपराध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बादलों को बेअदबी की घटनाओं में सजा से बचाकर राजनीति में फिर से स्थापित करने के लिए सीबीआई का किया जा रहा दुरुपयोग मोदी सरकार का बहुत ही घटिया हथकंडा है। 

मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश वासियों को अच्छी तरह से याद है कि बादलों ने उस समय दोषियों को बचाने और इंसाफ लेने के लिए उठी शक्तिशाली लोकलहर को दबाने के लिए क्या-क्या नहीं किया था। उन्होंने कहा कि बादलों ने उस समय उठी लोकलहर का मुकाबला करने के लिए सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल के झंडे के तले सछ्वावना कॉन्फ्रेंसें कराने का ढोंग भी रचा था। यही तरीका बादलों ने बेअदबी के दोषियों को सजा देने की मांग को लेकर 2018 में लगे बरगाड़ी इंसाफ मोर्चे के समय भी अपनाया था। मंत्रियों ने आरोप लगाया कि बादल तो अकाल तख्त साहिब का दुरुपयोग करके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफीनामा दिलाने तक भी चले गए थे लेकिन सिख पंथ में उठी गुस्से की लहर के कारण यह माफीनामा वापस लेना पड़ा था।


Mohit

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