जीरो टॉलरेंस के दावे खोखले? रेलवे फाटक के पास सुबह-सुबह नशे के इंजेक्शन लगाते दिखे युवक, वीडियो बनते ही मौके से फरार
punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 10:01 AM (IST)
लुधियाना (गणेश/सचिन): पंजाब सरकार भले ही राज्य में नशे के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" और "युद्ध नश विरुद्ध" जैसे बड़े-बड़े अभियान चलाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ताजा मामला लुधियाना के धूरी रेलवे फाटक के पास का है, जहां शुक्रवार सुबह दो युवक खुलेआम नशे के इंजेक्शन लगाने की तैयारी करते दिखाई दिए।
लंबे समय से नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ ये इलाका
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय लोगों ने उनकी वीडियो बनानी शुरू की तो दोनों युवक तुरंत वहां से फरार हो गए। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि धूरी रेलवे फाटक और उसके आसपास का इलाका लंबे समय से नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। यहां आए दिन युवक नशा करते दिखाई देते हैं। लोगों का आरोप है कि नशे की हालत में कई बार ये युवक आपस में झगड़ते हैं, गाली-गलौज करते हैं और मारपीट तक की नौबत आ जाती है। इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि एक तरफ सरकार नशा खत्म करने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम नशा होता दिखाई दे रहा है।
लोगों का आरोप है कि छोटे-मोटे लोगों पर कार्रवाई दिखाकर आंकड़े तो पेश किए जाते हैं, लेकिन नशे के असली कारोबारियों तक पहुंचने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि नशे के खिलाफ वास्तव में प्रभावी कार्रवाई हो रही होती तो युवकों को रेलवे फाटक जैसे सार्वजनिक स्थान पर बेखौफ होकर नशे के इंजेक्शन लगाने की हिम्मत नहीं होती। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नशे की आसान उपलब्धता यह साबित करती है कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या पर नियंत्रण पाने में विफल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि नशे के कारोबार और नशा करने वालों के खिलाफ दिखावटी नहीं बल्कि वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि इलाके के युवाओं को इस दलदल में जाने से रोका जा सके। लोगों का कहना है कि जब तक सड़कों और मोहल्लों में खुलेआम नशा करने वाले दिखाई देते रहेंगे, तब तक नशा मुक्त पंजाब के दावे केवल भाषणों और पोस्टरों तक ही सीमित माने जाएंगे।

