स्कूलों में छुट्टियां बढ़ने से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी पर लटकी तलवार, कोचिंग सैंटरों की 'चांदी' पर उठे सवाल

punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 02:14 PM (IST)

लुधियाना (विक्की): पंजाब सरकार ने राज्य में जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के मद्देनजर स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां एक बार फिर बढ़ा दी हैं। सरकार के इस फैसले ने स्कूल प्रिंसीपलों और प्रबंधकों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। दरअसल क्रमशः 17 और 12 फरवरी से सी.बी.एस.ई. और आई.सी.एस.ई. बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं और प्रैक्टिकल एग्जाम का शैड्यूल पहले से तय था जो छुट्टियों के बढ़ने के कारण पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। शिक्षाविदों का कहना है कि 14 जनवरी को स्कूल खुलने के बाद बच्चों के पास बोर्ड परीक्षाओं के लिए बमुश्किल 33 दिन बचेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि एक महीने में सिलेबस की रिवीजन, प्री-बोर्ड परीक्षाएं, प्रैक्टिकल एग्जाम और फेयरवैल पार्टियां कैसे निपटाए जाएंगे? छात्रों की तैयारियों का यह नुकसान उनके रिजल्ट पर भारी पड़ सकता है। हालांकि कई स्कूलों ने अपने यहां प्रैक्टिकल एग्जाम और प्री बोर्ड की तैयारियों को पहले से ही अंतिम रूप दे रखा है ताकि छुट्टियां खत्म होते ही उक्त दोनों एग्जाम को मुकम्मल कर बोर्ड को मार्क्स भेजे जाएं ताकि स्टूडैंट्स के एडमिट कार्ड जारी हो सकें।

कोचिंग सैंटरों पर सवाल : क्या वहां बच्चों को ठंड नहीं लगती?

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए 'बचपन बचाओ' सोसाइटी के अध्यक्ष रजत ने जिला प्रशासन और डी.सी. से मांग की है कि छुट्टियों के आदेश सिर्फ़ स्कूलों तक सीमित न रहें, बल्कि प्राइवेट कोचिंग सैंटरों पर भी सख्ती से लागू हों। उनका कहना है कि शहर के किचलू नगर, मॉडल टाऊन एरिया में कोचिंग इंस्टीच्यूट धड़ल्ले से चल रहे हैं और वहां बच्चों की भीड़ जुटी है। सवाल यह है कि क्या कोचिंग पर जाने वाले बच्चों को ठंड नहीं लगती? सरकार के आदेश सभी शिक्षण संस्थानों पर एक समान लागू होने चाहिएं। इस फैसले से डमी एडमिशन वाले विद्यार्थियों और कोचिंग माफिया को फायदा मिल रहा है, जबकि नियमित स्कूल जाने वाला छात्र पढ़ाई में पिछड़ रहा है।

स्कूल बंद लेकिन स्टाफ की ड्यूटी जारी

निजी स्कूलों का तर्क है कि एक तरफ ठंड के नाम पर बच्चों की छुट्टियां की गई हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और दफ्तरी स्टाफ को पी.एम. श्री योजना और अन्य सरकारी कार्यों के लिए स्कूलों में बुलाया जा रहा है। यदि सरकार बच्चों के खेल और अन्य इवैंट करवा सकती है और स्टाफ से काम ले सकती है, तो बच्चों की पढ़ाई का नुकसान क्यों किया जा रहा है? अगर ज्यादा जरूरी है तो सरकार को प्राइमरी तक के बच्चों को छुट्टी कर देनी चाहिए जबकि बोर्ड क्लासेज को तो स्कूल आने देना चाहिए ताकि बोर्ड एग्जाम की प्रक्रिया भी पूरी की जा सके।

चेयरमैन चेन ऑफ़ ग्रीनलैंड स्कूल्स डॉ राजेश रुद्रा ने कहा कि बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी से हैं अब प्रैक्टिकल एग्जाम के लिए समय नहीं बचा है। सरकार को सीनियर क्लासेज (10वीं-12वीं) के लिए स्कूल खोलने की अनुमति देनी चाहिए थी। वैसे शीत लहर के मद्देनजर सरकार का फैसला ठीक है लेकिन बोर्ड क्लासेज को छूट मिल जाती तो अच्छी बात होती। अध्यक्ष एच.वी.एम. ग्रुप ऑफ स्कूल्स डी.पी. शर्मा ने कहा कि छुट्टियों के कारण प्री-बोर्ड परीक्षाओं का शैड्यूल पूरी तरह से बिगड़ गया है। अब 14 जनवरी के बाद एक महीने में रिवीजन करवाना बहुत मुश्किल काम है। अध्यापकों को एकस्ट्रा क्लासेज लगाने के लिए कहा जाएगा।

क्या कहते हैं अभिभावक?

अभिभावक सुमन का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है लेकिन पढ़ाई का इतना नुकसान ठीक नहीं। मेरे बच्चे की 12वीं की परीक्षा है, अब सिलेबस कैसे पूरा होगा? एक अन्य अभिभावक कुलवीर सिंह ने कहा ककि बच्चे घर में रजाई में बैठकर सिर्फ मोबाइल देख रहे हैं, पढ़ने का रूटीन पूरी तरह टूट चुका है।

विद्यार्थियों में भी परेशान

12वीं के छात्र खुशप्रीत ने कहा कि हमें प्रैक्टिकल एग्जाम की प्रैक्टिस करनी थी। अब सीधा फाइनल एग्जाम में कैसे परफॉर्म करेंगे, इसका डर लग रहा है। ऐसे ही 10वीं की छात्रा भव्या ने कहा कि घर पर पढ़ाई का वह माहौल नहीं बन पाता जो स्कूल में होता है। डाऊट क्लीयर करने के लिए टीचर सामने चाहिए होते हैं।

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News Editor

Kalash

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