श्री भैणी साहिब से राज्यपाल का संदेश, पंजाब के भविष्य को लेकर कही अहम बात
punjabkesari.in Sunday, Jun 07, 2026 - 06:36 PM (IST)
लुधियाना : पंजाब के राज्यपाल Gulab Chand Kataria ने लुधियाना स्थित श्री भैणी साहिब के आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पवित्र धाम के दर्शन किए और आयोजित गुरमत समागम को संबोधित किया। नामधारी संप्रदाय के विश्व प्रमुख Satguru Uday Singh ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए नामधारी समुदाय की आध्यात्मिक परंपराओं और मानवीय मूल्यों की जानकारी सांझा की।
इस अवसर पर पंजाब राज्य सूचना आयुक्त Harpreet Sandhu द्वारा तैयार की गई एक विशेष चित्रकला, जिसमें Sachkhand Sri Harmandir Sahib की धार्मिक विरासत को दर्शाया गया था, सतगुरु उदय सिंह द्वारा राज्यपाल को स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की गई।
पंजाब का राज्यपाल बनने के बाद श्री भैणी साहिब की यह उनकी पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने परिसर में स्थित ऐतिहासिक राम मंदिर का भी दौरा किया, जहां वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ कूका आंदोलन की शुरुआत हुई थी। राज्यपाल ने मंदिर में लगी फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने नामधारी गौशाला का भी दौरा किया, जहां उन्होंने गायों को गुड़ खिलाया और गौ संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
राज्यपाल ने सतगुरु उदय सिंह की उपस्थिति में आयोजित गुरमत समागम में भाग लिया और कीर्तन का श्रवण किया। इस अवसर पर पंजाब के मुख्य सूचना आयुक्त Inderpal Singh Dhanna तथा राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू भी मौजूद रहे।
समागम को संबोधित करते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम की नींव सतगुरु राम सिंह जी ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध असहयोग आंदोलन चलाकर रखी थी। उन्होंने देश को धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दिशा प्रदान की तथा सत्य, सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उन्होंने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी की सोच को समाज सुधार का आधार बनाया जाना चाहिए।

कूका शहीदों के बलिदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी ने ऐसे क्रांतिकारी तैयार किए जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ साहसपूर्वक संघर्ष किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने बताया कि मलेरकोटला में 66 नामधारी सिंहों को अंग्रेजों ने तोपों से उड़ाया था, जबकि लुधियाना, रायकोट और अमृतसर में कई नामधारी सिंहों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।
राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों ने सबसे अधिक बलिदान दिए और नामधारी समुदाय का योगदान भी अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश की आजादी की वास्तविक शुरुआत कूका आंदोलन से हुई थी।
उन्होंने नामधारी संप्रदाय को सादगी, सत्य और विनम्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि समाज को उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि यदि कोई समाज पूरी तरह नशामुक्त है तो वह नामधारी संप्रदाय है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय ने चाय तक का त्याग किया हुआ है और ऐसी संस्कारयुक्त प्रेरणा ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए सतगुरु राम सिंह जी के आदर्शों और शिक्षाओं को अपनाना बेहद आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नामधारी संप्रदाय ने हमेशा पर्यावरण संरक्षण, कृषि और खेलों को बढ़ावा दिया है। समारोह के दौरान सतगुरु उदय सिंह ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, मुख्य सूचना आयुक्त इंदरपाल सिंह धन्ना और सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू को सिरोपा और सम्मान चिन्ह देकर सम्मानित किया।


