पंजाब में बंद हो सकती हैं FREE मिलने वाली सेवाएं! अफसरों ने दी चेतावनी
punjabkesari.in Saturday, Jun 13, 2026 - 02:26 PM (IST)
श्री मुक्तसर साहिब (पवन तनेजा, खुराना): पंजाब के ग्रामीण इलाकों में स्थित आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में मिल रही मुफ्त सेहत सेवाएं आने वाले दिनों में लंबे समय के लिए पूरी तरह ठप्प हो सकती हैं। लंबे समय से लटक रही मांगों और काम के बढ़ रहे बोझ को लेकर राज्य के सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर पिछले दो सालों रोष में हैं। जत्थेबंदी के नेताओं ने सेहत विभाग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजाते हुए बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। जिला स्तर के नेताओं ने बताया कि हर तरह की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी पूरी ईमानदारी और तनदेही से ड्यूटी निभाने वाले सी.एच.ओ. की जायज मांगों को सेहत विभाग पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। विभाग द्वारा मसलों को हल करने के बजाय उलटा कर्मचारियों का काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है और नया 'इंसेंटिव परफॉर्मा' लागू करके उनका मानसिक शोषण किया जा रहा है।
स्टेट कमेटी के फैसले के अनुसार अगर विभाग ने तुरंत मीटिंग करके मांगों को हल नहीं किया तो कड़ा संघर्ष किया जाएगा। अगर 15 जून तक पुराना इंसेंटिव परफॉर्मा बहाल न हुआ और मांगें न मानी गईं, तो गांव के सेहत केंद्रों की सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाएं पूरी तरह बंद करके ब्लॉक स्तर पर रोश प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। 22 जून को पंजाब के हर जिले में सिविल सर्जन ऑफिस के आगे बड़े स्तर पर धरने दिए जाएंगे। अगर फिर भी कोई हल नहीं निकला तो ब्लॉक लेवल पर हड़ताल और सेवाओं का बायकॉट 1 जुलाई तक लगातार जारी रहेगा। राज्य लेवल पर लिए गए फैसले के मुताबिक 2 जुलाई को राज्य भर के सभी CHO संगरूर जिले में पंजाब के मुख्यमंत्री के घर का घेराव करेंगे।
नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस हड़ताल के दौरान ग्रामीण इलाकों में मरीजों को होने वाली किसी भी तरह की परेशानी और हेल्थ सर्विस में रुकावट के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट और सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी। इस मौके पर मेजर सिंह, गुरप्यार सिंह, हरप्रीत सिंह, बलकरन सिंह और वीरपाल कौर समेत बड़ी संख्या में संगठन के नेता और कर्मचारी मौजूद थे।
कम्युनिटी हेल्थ अफसरों की मुख्य मांगें:
दूसरे राज्यों के मुकाबले पंजाब के CHO को 5000 रुपए कम मिल रही सैलरी के फर्क को दूर करके सैलरी बढ़ाई जाए, CHO का महीने और साल का काम का टारगेट 5000 की आबादी के नियम के हिसाब से ही तय किया जाए, तीन साल और पांच साल का 'लॉयल्टी बोनस' दिया जाए, 'बराबर काम बराबर वेतन' का नियम लागू करके कैडर सैंक्शन किया जाए और कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए, कर्मचारियों के इंसेंटिव को सीधा सैलरी में मर्ज किए जाए।
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