हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : सफाई सेवक को पेंशन देने के आदेश
punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 02:47 PM (IST)
मोगा (आजाद) : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा एक अहम फैसला सुनाते सफाई सेवक राजू को पेंशन लेने का हकदार करार दिया गया है। यह फैसला जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी तथा जस्टिस अमरजोत भट्टी की डिवीजन बैंच द्वारा एक अपील की सुनवाई दौरान सुनाया गया।
मामले के तथ्यों के अनुसार, राजू म्यूनिसिपल कौंसिल श्री मुक्तसर साहिब में सफाई सेवक के तौर पर काम करता था तथा वह 30 नवम्बर 2025 को रिटायर्ड हुए। राजू 25 मार्च 1994 को रैगुलर भर्ती हुए थे। जब पंजाब म्युनिसिपल इम्प्लॉई पेंशन रूल्स 1994 लागू हुए, तो 17 अगस्त 1994 को उनसे ऑप्शन लिया गया कि वह पेंशन नहीं लेना चाहते। कोर्ट ने साफ किया कि यह ऑप्शन लेना नियमों के खिलाफ है क्योंकि यह प्रोविजन सिर्फ उन इम्प्लॉई के लिए था जो 1 अप्रैल 1990 से पहले सर्विस में आए थे।
राजू 1994 में नियुक्त हुए थे, इसलिए वह इस कैटेगरी में नहीं आते थे और उनसे ऐसा कोई ऑप्शन नहीं लिया जाना चाहिए था। जब राजू रिटायर हुए, तो म्युनिसिपल काऊंसिल ने इसी ऑप्शन के आधार पर उनकी पेंशन कैंसिल कर दी। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में सिविल रिट पिटीशन नंबर 3963/2026 फाइल की। हालांकि, सिंगल बेंच ने उनके ऑप्शन को मानते हुए उनकी पिटीशन खारिज कर दी। इसके बाद राजू ने एल.पी.ए. नंबर 743 ऑफ 2026 के जरिए डिवीजन बैंच में अपील की।
डिवीजन बैंच ने सभी फैक्ट्स देखने के बाद सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर दिया और पेंशन के लिए राजू के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि 17 अगस्त 1994 को लिया गया ऑप्शन गैर-कानूनी था और इसका कोई कानूनी असर नहीं है। राजू पंजाब म्युनिसिपल इम्प्लाई पेंशन रूल्स 1994 के रूल 3 के तहत आते हैं, इसलिए वे पेंशन के सभी फायदों के हकदार हैं। डिवीजन बैंच ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि वे राजू को उनकी पेंशन और दूसरे लंबित फायदे 3 महीने के अंदर 6 प्रतिशत ब्याज के साथ दें।
इस केस में राजू की तरफ से सीनियर एडवोकेट वीरेन्द्र शुक्ला ने दलीलें दीं। यह केस राजू बनाम पंजाब सरकार के तौर पर रजिस्टर किया गया है और इस फैसले को म्युनिसिपल कार्पोरेशन के कर्मचारियों के लिए एक अहम मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
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