LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर! ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर, पढ़ें पूरी खबर
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 05:10 PM (IST)
जालंधर (धवन): अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच घरेलू गैस संकट ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। शहरों और कस्बों में एल.पी.जी. सिलैंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है, जिसके कारण आम उपभोक्ता एजैंसियों के लगातार चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कई इलाकों में उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि समय पर बुकिंग करवाने के बावजूद सिलैंडर कई-कई दिनों तक नहीं मिल रहे। वहीं दूसरी ओर खुले बाजार में अधिक कीमत लेकर तुरंत सिलैंडर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि घरेलू गैस सिलैंडर निर्धारित रेट से काफी ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा। गृहिणियों का कहना है कि रसोई का बजट पहले ही महंगाई की मार झेल रहा है और अब गैस संकट ने स्थिति और कठिन बना दी है। कई परिवारों को मजबूरी में होटल या बाहर का खाना लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां गैस एजैंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
उद्योग एवं व्यापार से जुड़े लोगों ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अंतर्राष्ट्रीय तनाव और बढ़ता है तो पैट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और महंगाई पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से जल्द हालात सामान्य करने और गैस आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। सामाजिक संगठनों और उपभोक्ता मंचों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजैंसियों की नियमित जांच करवाई जाए तथा ब्लैक मार्कीटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो वे प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई गैस एजैंसियों में फोन तक नहीं उठाए जा रहे और ऑनलाइन शिकायतों का भी कोई समाधान नहीं हो रहा। लोगों का कहना है कि एजैंसियों द्वारा ‘स्टॉक खत्म’ होने का बहाना बनाया जा रहा है, जबकि कुछ ही समय बाद वही सिलैंडर अधिक दामों पर उपलब्ध हो जाते हैं। इससे प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई नागरिक संगठनों ने मांग की है कि जिला प्रशासन विशेष अभियान चलाकर गैस गोदामों और एजैंसियों की जांच करे ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके।
राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने भी केंद्र एवं राज्य सरकारों से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि युद्ध जैसे हालात का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ता है और सरकार को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि गैस संकट और महंगाई पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे सकता है। साथ ही प्रशासन से पारदर्शी वितरण व्यवस्था लागू करने तथा जरूरतमंद परिवारों को राहत देने की भी मांग उठाई गई है।
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