पंजाब में खैर माफिया का भंडाफोड़, तस्करी से पहले पुलिस ने लकड़ी की बड़ी खेप की जब्त

punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 11:17 AM (IST)

नूरपुर बेदी/रूपनगर : नूरपुर बेदी क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय खैर माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और वन विभाग ने तस्करी से पहले ही खैर की बहुमूल्य लकड़ी की एक बड़ी खेप जब्त कर ली। यह कार्रवाई पंजाब मोर्चा के कन्वीनर गौरव राणा और टेढ़ेवाल पट्टी गांव के चौधरी रोशन लाल की सतर्कता और त्वरित पहल से संभव हो सकी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जतोली–टेढ़ेवाल पट्टी गांव के समीप, रूड़ेवाल फीड फैक्ट्री से आगे एक गोरी के पीछे स्थित वीरान भूमि पर पिछले कई दिनों से खैर के पेड़ों की अवैध कटाई की जा रही थी। माफिया द्वारा काटे गए खैर के पेड़ों के गट्टों को एकत्र कर रात के अंधेरे में बाहरी क्षेत्रों में तस्करी की तैयारी की जा रही थी। टेढ़ेवाल गांव के चौधरी रोशन लाल सहित अन्य ग्रामीणों ने खेतों की ओर जाते समय जब इस संदिग्ध गतिविधि को देखा तो तुरंत इसकी सूचना गौरव राणा को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए गौरव राणा ने बिना देरी किए पुलिस प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया।

सूचना मिलते ही डीएसपी आनंदपुर साहिब जशनदीप सिंह के निर्देश पर थाना नूरपुर बेदी के प्रभारी रोहित शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए खैर के 26 कटे हुए गट्टों को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। मौके पर मौजूद वन विभाग के अधिकारी सुखबीर सिंह ने बताया कि खैर माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाग का कोई कर्मचारी लापरवाही में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई होगी।

इस दौरान गौरव राणा और चौधरी रोशन लाल ने कहा कि खैर की तस्करी केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि पर्यावरण के खिलाफ गंभीर अपराध है। उन्होंने बताया कि यह अवैध धंधा लंबे समय से क्षेत्र में चल रहा है, जिससे माफिया करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रहा है। गौरव राणा ने कहा कि रूपनगर जिला सतलुज नदी, शिवालिक पहाड़ियों और बहुमूल्य वन संपदा से समृद्ध है, लेकिन अवैध खनन और जंगलों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरणीय संतुलन को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने जिले के सभी आठ एग्ज़िट प्वाइंट्स पर रात्रिकालीन स्थायी नाकाबंदी और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की।

खैर का पेड़: प्रकृति की अमूल्य धरोहर

•खैर का पेड़ पूरी तरह विकसित होने में 20 से 25 वर्ष लेता है
•इसकी लकड़ी का उपयोग कत्था निर्माण, आयुर्वेदिक औषधियों और कपड़ा रंगाई में होता है
•यह मिट्टी के कटाव को रोकने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से बचाव में सहायक है
•खैर के जंगल वन्य जीवों के लिए आश्रय और भोजन का प्रमुख स्रोत हैं
•एक खैर का पेड़ काटना दशकों पुराने पर्यावरणीय संतुलन को नष्ट करने जैसा है

मुख्य बिंदु

•नूरपुर बेदी में खैर माफिया का संगठित नेटवर्क उजागर
•गौरव राणा व चौधरी रोशन लाल की सूचना से तस्करी नाकाम
•पुलिस व वन विभाग ने 26 खैर गट्टे किए जब्त
•खैर का पेड़ तैयार होने में लगते हैं 20–25 वर्ष
•जिले के एग्ज़िट प्वाइंट्स पर नाकाबंदी की मांग तेज

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Urmila

Related News