महिला आरक्षण बिल गिराना भ्रूण ह'त्या जैसा पाप, खट्टर का विपक्ष पर तीखा हमला

punjabkesari.in Sunday, Apr 19, 2026 - 04:16 PM (IST)

जालंधर : कांग्रेस और ‘आप’ समेत पूरे विपक्ष ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को पास होने से रोककर देश की आधी आबादी के खिलाफ घिनौनी साजिश की है, जो भ्रूण हत्या जैसा पाप है। इसका खामियाजा इन महिला-विरोधी पार्टियों को चुनाव परिणामों के रूप में भुगतना पड़ेगा। ये शब्द केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हैं।

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिराने के लिए विपक्ष द्वारा महिलाओं के अधिकारों पर किए गए हमले के खिलाफ जन-जागरूकता के मद्देनज़र भाजपा ने पूरे देश में जन-आक्रोश अभियान शुरू किया है। इसी के तहत खट्टर और उत्तर प्रदेश की कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य भी जालंधर पहुंचे थे। श्री खट्टर ने कहा, “कांग्रेस ने अपने दशकों पुराने इतिहास के अनुसार महिलाओं को राजनीतिक और नीति-निर्माण के क्षेत्र में भागीदारी देने के प्रयासों में एक बार फिर बाधा डाली है। यह बिल पास कराना महिलाओं पर कोई एहसान नहीं था, बल्कि उनका अधिकार है।”

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास कराया था, जिसे 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू करने का वादा किया गया था। यह बिल सर्वसम्मति से पारित हुआ था, इसलिए इस बार भी विपक्ष से समर्थन की उम्मीद थी। लेकिन 2021 में कोविड के कारण जनगणना में देरी होने से परिसीमन (डिलिमिटेशन) नहीं हो सका। अब भले ही जनगणना का कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन उसके बाद नए परिसीमन के लिए समय बहुत कम है। इसलिए संवैधानिक संशोधन का बिल लाया गया था, जिसे कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने पास नहीं होने दिया।

हालांकि लोकसभा में एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है, लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। विपक्ष ने निजी, पारिवारिक और दलगत हितों के कारण इसे पास नहीं होने दिया, जिससे महिलाओं का अधिकार और पीछे चला गया। लेकिन भारतीय जनता पार्टी हार नहीं मानेगी और इसके लिए लगातार प्रयास करती रहेगी। इस मौके पर संबोधित करते हुए बेबी रानी मौर्य ने कहा कि कांग्रेस, आप, सपा और डीएमके जैसी पार्टियों ने सोची-समझी साजिश के तहत महिलाओं का हक छीना है। इन पार्टियों ने तीन तलाक, राम मंदिर, आयुष्मान भारत और नए संसद भवन का भी विरोध किया था।

उन्होंने कहा, “मैं इसकी कड़ी निंदा करती हूं। बिल का विरोध करके ये पार्टियां न केवल हमारी बल्कि आधी आबादी की नजरों से भी गिर गई हैं। महिलाएं अपनी बेइज्जती कभी नहीं भूलतीं। मैं सभी महिलाओं से अपील करती हूं कि विपक्षी पार्टियों को आगामी चुनावों में सबक सिखाएं।” इस मौके पर पंजाब भाजपा की प्रदेश सचिव मीनू सेठी, शैली खन्ना (प्रदेश उपाध्यक्ष, महिला मोर्चा), जिला महामंत्री महिला मोर्चा जालंधर शालू, पार्षद मीनू ढंड, अनु शर्मा और मीना शर्मा (जिला सचिव, जालंधर भाजपा) समेत कई अन्य भाजपा नेता उपस्थित थे।

*1979 से महिलाओं को नीति-निर्माण में अधिकार देने के प्रयास शुरू हुए थे, पंचायती राज में इसे 50% तक दिया गया।
*1996 में देवगौड़ा सरकार ने महिला बिल (81वां संशोधन) लोकसभा में पेश किया, लेकिन पास नहीं हुआ।
*1998 से 2003: अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने चार बार बिल पास कराने की कोशिश की।
*2010: मनमोहन सिंह सरकार महिला आरक्षण बिल लाई, लेकिन सफल नहीं हो सकी, हालांकि राज्यसभा में यह पास हो गया था।
*2023: नरेंद्र मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संशोधन) के तहत संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण पास कराया।
*2026: नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश किया गया, लेकिन आवश्यक संवैधानिक संशोधन को विपक्षी पार्टियों ने पास नहीं होने दिया।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Urmila

Related News