NRI मर्डर मिस्ट्री में आया बड़ा मोड़ : महिला की ह+त्या को सुलझाने के चक्कर में मरे हुए बंदे की करवा दी गवाही

punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 09:29 AM (IST)

लुधियाना (राज): शहर के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल एनआरआई महिला रुपिंदर कौर हत्याकांड में एक ऐसा हैरतअंगेज मोड़ आया है, जिसने पूरी पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। इसे खाकी पर दाग कहें या फिर जांच के नाम पर हुआ बड़ा खेल, क्योंकि अब कातिलों को पकड़ने वाली पुलिस खुद कटघरे में खड़ी हो गई है।

72 वर्षीय NRI महिलाकी बेरहमी से की गई हत्या
इस सनसनीखेज मामले में डेहलों थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और थाना मुंशी हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने केस को सुलझाने के चक्कर में आरोपियों ने कई महीने पहले मरे हुए व्यक्ति की गवाही करवा दी। उसके फर्जी साइन भी खुद ही कर दिए। आरोपियों ने सबूतों से सरेआम खिलवाड़ किया, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की और जाली दस्तावेज तक तैयार कर डाले। यह पूरा मामला 72 वर्षीय एनआरआई महिला रुपिंदर कौर की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है, जो अमेरिका से पंजाब आई थीं। अगस्त 2025 में जब उनके लापता होने की बात सामने आई, तो पुलिस ने जांच की सुई घुमाई और दावा किया कि महिला की हत्या सुखजीत सिंह नाम के शख्स ने अपने ही घर के स्टोर रूम में कर दी थी। पुलिस की कहानी के मुताबिक, हत्या के बाद लाश को कमरे में जलाया गया, सबूत मिटाने के लिए फर्श तोड़ा गया और सीसीटीवी कैमरे तक बदल दिए गए।

गुरप्रीत सिंह नामक गवाह का बयान 19 सितंबर 2025 को दर्ज दिखाया
इस मामले में पुलिस ने सुखजीत को गिरफ्तार किया और फिर यूके के रहने वाले एनआरआई चरणजीत सिंह, उसके भाई मनवीर सिंह उर्फ मनी पहलवान और एक अन्य आरोपी दानिश को भी केस में नामजद कर लिया। पुलिस ने जली हुई हड्डियां, आईफोन के अवशेष और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा भी ठोक दिया। लेकिन कानून के हाथ जितने लंबे होते हैं, झूठ के पैर उतने ही छोटे होते हैं। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब आरोपी मनवीर सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अग्रिम जमानत याचिका में उसने जो दावा किया, उसने अदालत से लेकर पुलिस मुख्यालय तक सबको हिलाकर रख दिया। याचिका में साफ कहा गया कि पुलिस ने केस फाइल में जिस गुरप्रीत सिंह नामक गवाह का बयान 19 सितंबर 2025 को दर्ज दिखाया है, उस बेचारे की मौत तो वारदात से महीनों पहले यानी 29 मई 2025 को ही हो चुकी थी। अब सवाल यह खड़ा हो गया कि जो इंसान इस दुनिया में ही नहीं था, उसने थाने आकर गवाही कैसे दे दी।

लुधियाना पुलिस में मच गया हड़कंप
इस खौफनाक खुलासे के बाद जब पंजाब पुलिस के आला अधिकारियों ने आनन-फानन में एसआईटी का गठन किया, तो परदे के पीछे का सच सामने आने लगा। जांच में पता चला कि केस फाइल में दर्ज विवादित बयानों पर तत्कालीन एसएचओ सुखजिंदर सिंह के असली दस्तखत ही नहीं थे। जब पूर्व एसएचओ से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने लिखित में पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि उनके ट्रांसफर के बाद केस फाइल थाना रीडर संजीव कुमार के पास थी और ये हस्ताक्षर फर्जी हैं। एसआईटी को जांच में एक और ऐसा ही संदिग्ध बयान मिला, जिसने इस बात पर पक्की मोहर लगा दी कि केस में भारी जालसाजी हुई है। अब वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर डेहलों थाना पुलिस ने अपने ही महकमे के इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत फर्जी साक्ष्य और जाली रिकॉर्ड तैयार करने का नया मुकदमा ठोक दिया है, जिससे लुधियाना पुलिस में हड़कंप मच गया है।


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Vatika

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