पंजाब में गहरा सकता है बिजली संकट! थर्मल प्लांटों के 5 यूनिट बंद
punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 03:33 PM (IST)
बठिंडा (विजय) : पंजाब में कोयले की कमी को लेकर पंजाब व केंद्र के बीच जारी खींचतान में प्रदेश का बिजली संकट गहराता जा रहा है जिसके चलते बिजली उत्पादन 1,500 मैगावाट तक गिर गया है। बिजली मंत्री का दावा है कि पंजाब के कुछ बड़े थर्मल पावर प्लांट आधी क्षमता पर चल रहे हैं और कई प्लांटों के पास केवल 3 से 4 दिन का कोयला स्टॉक बचा है, जिसके चलते बिजली उत्पादन क्षमता करीब 1,500 मैगावाट घट गई है। इसके चलते पिछले 2-3 दिनों से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ औद्योगिक क्षेत्र को भी बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है।
यदि आने वाले दिनों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो बिजली संकट और गहराने की आशंका है। देशभर में कोयले की कमी से करीब 63 मैगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। केंद्र की ओर से राजपुरा स्थित नाभा पावर प्लांट और मानसा के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट को जरूरत के मुताबिक कोयला नहीं मिलने से पंजाब की बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
पंजाब में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 2 सितम्बर को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 16,343 मैगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए सरकार को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ी और एक ही दिन में करीब 119.5 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई। थर्मल प्लांटों के 5 यूनिट बंद रहने का सीधा असर औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है। लुधियाना, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्रों में करीब साढ़े 4 घंटे तक बिजली कट लगाने पड़े, जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
दूसरी तरफ पंजाब सरकार के दावों के विपरीत केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने प्रदेश में कोयले की कमी होने से इंकार किया। मंत्रालय के अनुसार 4 सितम्बर तक पी.एस.पी.सी.एल. के अपने थर्मल प्लांटों के पास निर्धारित जरूरत के मुकाबले 117 प्रतिशत कोयला स्टॉक मौजूद था।
केंद्र ने दावा किया कि अगस्त के दौरान पंजाब के अपने थर्मल प्लांट औसतन केवल 42 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर पर चले जबकि नाभा पावर प्लांट ने करीब 93 प्रतिशत क्षमता के साथ बिजली उत्पादन किया। केंद्र का तर्क है कि उपलब्ध कोयले की समय पर लिफ्टिंग और प्लांटों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।
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