पंजाब-हरियाणा में भीषण गर्मी को लेकर चेतावनी! 52 सालों की रिसर्च में खुलासा
punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 12:07 PM (IST)
जीरकपुर: पिछले 52 वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में पंजाब-हरियाणा समेत उत्तर-पश्चिमी भारत को देश में बढ़ती गर्मी के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने रखा गया है। 1971 से 2022 तक के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, इस क्षेत्र में दिन के तापमान, गर्मी के मानव शरीर पर प्रभाव और लू की तीव्रता में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं। यह अध्ययन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र से जुड़े वैज्ञानिकों ने किया है और इसे ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है।
शोध में तापमान, हीट इंडेक्स, लू की तीव्रता, भारी बारिश और सूखे समेत सात मानकों को मिलाकर भारतीय जलवायु चरम स्थिति सूचकांक तैयार किया गया। अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद कई वर्षों के दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत का 15 से 20 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र अत्यधिक दिन की गर्मी के प्रभाव में रहा।शोधकर्ताओं ने लगातार बढ़ती गर्मी को शुष्क परिस्थितियों, मिट्टी में घटती नमी और जमीन के अधिक गर्म होने से भी जोड़ा है। अध्ययन में पंजाब समेत सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्रों के लिए सिंचाई से जुड़ा पहलू भी अहम बताया गया है। पानी की कमी वाले वर्षों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घटने से गर्मी का दबाव और गंभीर हो सकता है।
मुख्य लेखक थोथा मोहन के मुताबिक, अध्ययन किए गए क्षेत्रों में उत्तर-पश्चिमी भारत में लू की तीव्रता सबसे तेजी से बढ़ रही है। सह-लेखक एम. राजीवन ने भी इस क्षेत्र में दिन की गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया है। शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी भारत में बढ़ती गर्मी से निपटने को प्राथमिकता देने और कृषि, पानी, स्वास्थ्य तथा बुनियादी ढांचे को जोड़कर योजना बनाने की जरूरत बताई है। 52 वर्षों का यह रुझान संकेत देता है कि पंजाब-हरियाणा के लिए बढ़ती गर्मी अब केवल मौसमी घटना नहीं, बल्कि लंबे समय की बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

