पंजाब पुलिस के 13 अफसरों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी, जानें पूरा मामला

punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 10:37 AM (IST)

लुधियाना(राज): महानगर में कानून के रखवालों की लापरवाही अब उन पर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। एक 82 वर्षीय बुजुर्ग के साथ हुई 15 लाख की साइबर धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई न करना 13 पुलिस अधिकारियों को भारी पड़ गया है। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी अधिकारियों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने आरोपी के पकड़े जाने के बावजूद उसे भागने का मौका दिया और जांच में घोर लापरवाही बरती।

मामला 2021 का है, जब उधम सिंह नगर के रहने वाले वरिंदर सूद के बैंक खाते से बिना ओटीपी के 15 लाख रुपये उड़ा लिए गए थे। बुजुर्ग न्याय के लिए 5 साल तक दर-दर भटकता रहा और अंत में उसे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि पीड़ित के बेटे ऋषि सूद ने खुद एक आरोपी नील कमल को ट्रेस कर पुलिस को सूचना दी थी। हिमाचल प्रदेश में छापेमारी के दौरान आरोपी पकड़ा भी गया, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसे हिरासत से भागने दिया और तब से लेकर आज तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। इस मामले की जांच करने वाले 3 एसीपी रैंक के अधिकारियों और 10 इंस्पेक्टर्स को अब सात दिनों के भीतर अपनी सफाई देनी होगी। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित ने अब बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी नोटिस के घेरे में आए ACP और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी :-

एसीपी सुमित सूद: वर्तमान में एसीपी ईस्ट, लुधियाना के पद पर तैनात हैं।
डीएसपी मनिंदर बेदी: घटना के समय एसीपी नॉर्थ के पद पर तैनात थे। अब SP रिटायर्ड 
डीएसपी बिट्टन कुमार: वह भी इस मामले की जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। घटना के समय इंस्पेक्टर रैंक पर थे।
इंस्पेक्टर परमदीप सिंह: हैबोवाल के एसएचओ के रूप में कार्यरत रहे। अब थाना कूमकलां तैनात।
इंस्पेक्टर सतपाल: इस मामले की समय-समय पर जांच करने वालों में शामिल। अब रिटायर्ड।
इंस्पेक्टर आकाश दत्त: जांच प्रक्रिया में लापरवाही के आरोपी।
इंस्पेक्टर गगनप्रीत सिंह: उन अधिकारियों में शामिल जिन्होंने आरोपी को पकड़ने में सुस्ती दिखाई।
इंस्पेक्टर हरजीत सिंह: घटना के समय सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर तैनात थे।अब रिटायर्ड।
इंस्पेक्टर परमवीर सिंह: वर्तमान में कमिश्नरेट के विभिन्न थानों में एसएचओ के रूप में तैनात अधिकारियों में से एक।
इंस्पेक्टर अमृतपाल सिंह: जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा न करने का आरोप।
इंस्पेक्टर मधु बाला: उन 13 अधिकारियों की सूची में शामिल जिन्हें 'कारण बताओ' नोटिस दिया गया है।
इंस्पेक्टर गुरमुख सिंह: जांच के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों में नामजद।
इंस्पेक्टर सतवीर सिंह: वर्तमान में एसएचओ के रूप में कार्यरत और नोटिस के घेरे में।


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Vatika

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