2022 में सिद्धू पंजाब की राजनीतिक पिच पर खुलकर बैटिंग करने के मूड में!

7/1/2020 9:53:01 AM

पठानकोट (शारदा): पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक नवजोत सिंह सिद्धू को शायद इस बात का आभास नहीं था कि लोकसभा चुनावों के कुछ दिन बाद ही उनकी राजनीतिक डगर कितनी मुश्किल होने वाली है। बठिंडा लोकसभा क्षेत्र में की गई उनकी एक टिप्पणी को आधार बनाकर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सिद्धू उनका स्थान लेना चाहते हैं और अंतत: लोकसभा चुनावों में मोदी के हाथों कांग्रेस की हुई फजीहत से हाईकमान जहां सकते में थी, उसी समय अपनी राजनीतिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए कैप्टन ने सिद्धू का विभाग ही बदल दिया।
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अचानक स्टार प्रचारक से इतनी बड़ी पटखनी को सिद्धू पचा नहीं पाए और मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस द्वारा स्पीक इंडिया एन.आर.आई. शृंखला शुरू की गई है, जब उसमें सिद्धू के आने की बात हुई तो तभी से राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस कार्यक्रम पर टिक गई थीं कि सिद्धू के इतने माह बाद अचानक कांग्रेस के मंच से बोलने का क्या अभिप्राय: है? इस कार्यक्रम में सिद्धू जिस प्रकार से बोले वह केवल एन.आर.आइज के लिए ही नहीं अपितु पंजाब की जनता के लिए भी स्पष्ट संदेश है और  प्रियंका गांधी तथा राहुल गांधी की चिंता को भी बढ़ाने वाला है। ऐसा लगता है कि 2022 में सिद्धू पंजाब की राजनीतिक पिच पर खुलकर बैटिंग करने के मूड में हैं। कांग्रेस के इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल सिद्धू ने बाखूबी करते हुए कहा कि वह पंजाब की प्रत्येक समस्या को अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे पास हर समस्या का समाधान और क्लीयर दृष्टिकोण है।
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2022 के चुनाव को लेकर वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यह अगली जैनरेशन के लिए होने वाला चुनाव है, जो पंजाब से निराश होकर तेजी से पलायन कर रही है। उन्होंने कहा कि, ‘‘मेरे लिए राजनीति मिशन है, व्यवसाय नहीं, जो पैसा सरकार के पास आना चाहिए था वह निजी हाथों में जा रहा है। अगर अभी हमने इस डैमेज को कंट्रोल न किया तो परिस्थितियां हमारे हाथ से निकल जाएंगी। चाहे कांग्रेस हाईकमान इस बात को लेकर खुश थी कि नवजोत सिद्धू ने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस में बोलने पर हामी भर दी है, परंतु जिस प्रकार सिद्धू ने अपने तेवर दिखाए उसने एन.आर.आइज, पंजाबियों एवं कांग्रेस हाईकमान के  समक्ष अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए पूरी बाजी को ही पलट दिया। रेत की तरह सिद्धू कांग्रेस हाईकमान के हाथ से निकलते जा रहे हैं और चाहकर भी हाईकमान उसे फिसलने से रोकती नजर नहीं आ रही। राजनीति की समझ रखने वाले कांग्रेसी नेता जब सिद्धू को लेकर कोई बात करते हैं तो वह इस बात को लेकर काफी हद तक आश्वस्त हैं कि कांग्रेस के सिवाय सिद्धू के पास कोई अधिक विकल्प नहीं है।
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वह गांधी परिवार को खुश करने के चक्कर में पी.एम. मोदी से राजनीतिक रूप से काफी दूरी बना चुके हैं, जहां तक आम आदमी पार्टी के संयोजक और देश की राजधानी दिल्ली के सी.एम. केजरीवाल का सवाल है तो वह कभी नहीं चाहेंगे कि उनकी पार्टी में सिद्धू जैसा कद्दावर नेता आसानी से अपने पांव जमा ले। कांग्रेसियों के इस दृष्टिकोण से ऐसा लगता है कि कांग्रेस के अलावा सिद्धू के पास कोई विकल्प नहीं है, परंतु इंडियन ओवरसीज कांग्रेस द्वारा पंजाब को ऊपर उठाने के लिए अपने स्टार प्रचारक सिद्धू से जो संदेश दिलाया है वह और ही स्थितियां बयान कर रहा है। सिद्धू खामोश रह कर कांग्रेस में अपनी राजनीतिक पारी को यूं ही समाप्त करना नहीं चाहेंगे। सारा पंजाब उनकी तरफ देख रहा है और वह 2022 को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहते। जिस प्रकार ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में जाने से जो राजनीतिक धमाका हुआ है उससे सारे देश के कांग्रेसी वर्कर हिल गए थे, क्या ऐसी ही स्थिति सिद्धू के मामले में होगी यह सब आने वाले समय में देखना होगा।  


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