AK-47 से भूने गए नामधारी नेता के कातिल का स्केच जारी, सुराग देने वाले को मिलेगा 2 लाख का इनाम!

punjabkesari.in Saturday, Jul 04, 2026 - 06:25 PM (IST)

लुधियाना (राज) : नामधारी संप्रदाय के हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज अवतार सिंह तारी हत्याकांड को सुलझाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 15 साल बाद एक बार फिर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। चंडीगढ़ स्थित CBI की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने इस खूनी कत्लेआम को अंजाम देने वाले मुख्य संदिग्ध शूटर का स्केच जारी कर दिया है। इसके साथ ही एजेंसी ने कातिल की पहचान बताने या उसकी जानकारी देने वाले व्यक्ति को 2 लाख रुपए नकद ईनाम देने की घोषणा भी की है। CBI ने इसके लिए आधिकारिक नंबर जारी किए हैं और साफ किया है कि जानकारी देने वाले देशभक्त नागरिक का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।

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ए.के.-47 से दागी थीं 11 गोलियां, दहल गया था लुधियाना का कटानी कलां मार्ग:

यह खौफनाक वारदात 12 अप्रैल 2011 की है। मोहाली के रहने वाले और नामधारी संप्रदाय के कट्टर अनुयायी अवतार सिंह तारी अपनी टोयोटा कोरोला कार में सवार होकर भैणी साहिब जा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे जब वह लुधियाना जिले के कटानी कलां-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर पहुंचे, तो मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए 2 अज्ञात नकाबपोश हमलावरों ने उनकी कार को घेर लिया। हमलावरों के पास खतरनाक ए.के.-47 राइफल थी। कातिलों ने अवतार सिंह तारी पर अंधाधुंध फायरिंग की और उनके शरीर में एक के बाद एक 11 गोलियां उतार दीं। इस भीषण और अत्याधुनिक हमले में तारी की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। जिससे पुरे लुधियाना में हडक़ंप मच गया था और यह उस साल की सबसे बड़ी वारदात थी।

वर्चस्व की जंग, नामधारी गुटों के संघर्ष से जुड़े थे तार:

उस समय की मीडिया रिपोट्र्स और पुलिस तफ्तीश के मुताबिक, इस कत्लेआम को नामधारी संप्रदाय के भीतर उत्तराधिकार और वर्चस्व को लेकर चल रहे गुटीय संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा था। मृतक अवतार सिंह तारी, सतगुरु जगजीत सिंह के दामाद संत जगतार सिंह के बेहद करीबी और दाहिने हाथ माने जाते थे। वारदात के बाद अवतार सिंह के बहनोई बलवंत सिंह के बयानों के आधार पर थाना साहनेवाल में हत्या का केस दर्ज किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, तारी पर इससे पहले भी मोहाली में दो बार जानलेवा हमले की कोशिशें हो चुकी थीं। खेती और रियल एस्टेट के बड़े कारोबार से जुड़े तारी अपने पीछे पत्नी, 3 बेटियां और एक बेटा छोड़ गए थे।

सफेद कुर्ता-पायजामा और हरे रंग की पैंट में आए थे हत्यारे:

पुलिस एफ.आई.आर. के मुताबिक उस समय तारी को शक हो गया था उसका कोई पीछा कर रहा है। चोरी-छिपे पीछा किए जाने के शक में तारी ने हमले वाले दिन कटानी कलां में अपने एक रिश्तेदार की दुकान के बाहर गाड़ी रोकी थी। लेकिन जैसे ही वह दुकान से कदम बाहर निकालने लगे, मोटरसाइकिल सवार दोनों शूटरों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक, एक हमलावर ने सफेद कुर्ता-पायजामा और सिर पर सफेद परना बांध रखा था, जबकि दूसरा हरे रंग की पैंट में था।

जांच में 6 साल पंजाब पुलिस रही फिसड्डी, फिर हुई थी CBI की एंट्री:

पंजाब पुलिस ने करीब 6 साल तक इस मामले की जांच की फिर इसकी फाइल पुराने रिकार्ड में दब गई थी। पंजाब पुलिस असली शूटरों या इस खूनी साजिश के पीछे बैठे आकाओं के चेहरे बेनकाब करने में पूरी तरह नाकाम रहे। स्थानीय पुलिस की इस बड़ी नाकामी और मामले के इंटरनेशनल कनेक्शन को देखते हुए पंजाब सरकार ने आखिरकार यह केस CBI को सौंप दिया। सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच, चंडीगढ़ ने केस टेकओवर कर नए सिरे से एफ.आई.आर. दर्ज की।

फाइलें दोबारा खुलीं, कडिय़ों को जोड़ रही केंद्रीय एजेंसी:

अब CBI ने इस ठंडे बस्ते में जा चुके केस की फाइलें दोबारा खोल दी हैं। पुराने गवाहों के बयान दोबारा दर्ज किए गए हैं और कड़े सुरक्षा घेरे में रहने वाले नामधारी संप्रदाय के दोनों धड़ों के प्रमुखों और संदेहास्पद लोगों से लंबी पूछताछ की जा चुकी है। अब जब शूटरों की पहचान को लेकर पेंच फंसा, तो CBI ने वैज्ञानिक और चश्मदीदों के इनपुट के आधार पर संदिग्ध का स्केच जारी कर जनता से सहयोग मांगा है। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इस स्केच और 2 लाख के इनाम के बाद कातिलों का ठिकाना जल्द ही कानून के शिकंजे में होगा। 

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News Editor

Kamini

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