क्रिकेट के महारथी नवजोत सिद्धू और इमरान खान आखिर क्यों राजनीति में हो गए फ्लॉप

punjabkesari.in Saturday, Apr 09, 2022 - 01:37 PM (IST)

जालंधर (अनिल पाहवा): यूं तो कई क्षेत्रों से लोग राजनीति में आते हैं जिनमें से कुछ कामयाब रहते हैं और कुछ समय के हिसाब के साथ राजनीति में से गायब हो जाते हैं। क्रिकेट के क्षेत्र में से 2 दिग्गज राजनीति में आए और आजकल दोनों अपने-अपने क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पंजाब कांग्रेस के प्रधान रहे नवजोत सिंह सिद्धू की। दोनों नेताओं ने राजनीति में आने से पहले क्रिकेट में धूम मचायी और बाद में राजनीति को पेशा बना लिया।

पाकिस्तान में इमरान की सियासत
इमरान खान ने पाक की तरफ से कई क्रिकेट मैच खेले और समय-समय पर पाक लोगों की आंखों का तारा भी रहे। 2018 में वह पाक की सत्ता में आए और आते नया पाक बनाने पर भ्रष्टाचार रहित प्रशासन देने का वायदा किया। लोगों को क्रिकेटर के तौर पर अपने लिए ताली बजाने पर मजबूर करने वाले इमरान राजनीति में लोगों की ताली हासिल करेंगे, इस बात की काफी उम्मीद थी। पाक आर्मी के साथ मिलकर काम करना और आर्मी पर हावी रहना कोई छोटी बात नहीं। इसी कोशिश में इमरान पिछले लगभग 4 वर्ष से लगे हुए हैं परन्तु पाक में इमरान का प्रधानमंत्री पद से जाना लगभग तय है।

भारत में सिद्धू की सियासत
भारत में कांग्रेस पिछले लगभग 8 वर्ष से सत्ता से बाहर है। पंजाब में पार्टी सत्ता में थी परन्तु इस दरमियान पंजाब के कांग्रेस प्रधान के पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी हो गई। कैप्टन अमरिन्दर सिंह को दरकिनार करके गांधी परिवार ने सिद्धू को वेल्यु दी परन्तु पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान की तरह भारत के पूर्व क्रिकेटर और राजनीति में आए सिद्धू का समय अच्छा नहीं चल रहा। उनकी अध्यक्षीय में पंजाब में कांग्रेस सत्ता से तो बाहर हुई ही, के साथ ही 18 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा धक्का है जिसको देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू समेत 5 राज्यों के राज्य प्रधानों से इस्तीफा मांग लिया। 

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इस्तीफा बेशक अभी मंजूर नहीं हुआ और न ही नए प्रधान की ताजपोशी हुई है जिस कारण सिद्धू इस सीट पर खुद को बरकरार मान रहे हैं। सिद्धू मतदान में खुद हार गए और उनकी पार्टी के और कई दिग्गज विधायक और मंत्री भी हार गए। अब एक बार फिर सिद्धू कांग्रेस में प्रधान का पद हासिल करने के लिए झंडा उठा कर मैदान में उतर आए हैं और मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरने की हर कोशिश कर रहे हैं। बेशक उनकी यह कोशिश कोई खास रंग लाती नजर नहीं आ रही। गुरुवार केंद्र खिलाफ चंडीगढ़ कांग्रेस दफ्तर में लगे धरने दौरान जिस तरह कांग्रेस यूथ प्रधान बरिन्दर ढिल्लों ने सिद्धू के मुंह पर सवाल खड़े कर दिए वह कांग्रेस और सिद्धू के लिए कोई अच्छा संकेत नहीं है।

सिद्धू और इमरान में फर्क
सिद्धू और इमरान में अगर कुछ समानताएं हैं तो कुछ फर्क भी हैं जिन बारे चर्चा होनी जरूरी है। क्रिकेट से राजनीति में आने दौरान इमरान को कई वर्ष पार्टी बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा तो कहीं जाकर वह कामयाब हुए और पाक की सत्ता में आकर देश के प्रधान मंत्री बने। दूसरी तरफ सिद्धू इस मामले में इमरान की अपेक्षा ज्यादा किस्मत वाले रहे। बेशक सिद्धू अभी तक देश के प्रधानमंत्री तो नहीं बन सके परन्तु राजनीति में उन्होंने बेहतर ढंग के साथ पारियां खेलीं। बड़े आराम के साथ वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में कुछ वर्ष पूरा मान-सम्मान हासिल करने के बाद वह कांग्रेस में आ गए। कांग्रेस में समय-समय पर वह खुद को सबसे ऊपर बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं। फिर चाहे कांग्रेस के नेताओं के साथ उनकी टसल हो या फिर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ उनका वैर।

सिद्धू और इमरान की गलतियां
इमरान का प्रधानमंत्री बनना और सिद्धू का पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनना अपने-आप में बड़ी सफलता थी परन्तु यह नहीं कि दोनों ने गलतियां नहीं की। ट्रम्प की तरह यह नेता भूल गए कि संगठनों में खुद को सब कुछ बनाना और अहमियत देना एक स्तर तक ठीक रहता है। ट्रम्प ने जनवरी में अमरीका में कुछ विरोध को लेकर लोगों का अपमान करने की कोशिश की, उसी तरह इमरान खान ने भी पाकिस्तान की गलियों में उनके खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने के लिए विदेशी साजिशों का दावा कर दिया। इस मामले में सिद्धू भी पीछे नहीं रहे। अभी जैसे सम्पन्न हुई पंजाब की विधान सभा मतदान में सिद्धू समय-समय पर इस्तीफा देने की धमकियां देते रहे और अपने ही सी.एम. फेस चरणजीत सिंह चन्नी पर बिना नाम लिए उंगली उठाते रहे।

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कुल मिला कर ट्रम्प के साथ जो हुआ, उसी तरह अगर इमरान और सिद्धू के साथ भी होता तो यह काफी डरावना होता। ट्रम्प अब सत्ता से बाहर हैं और इमरान को सत्ता से बाहर करने का प्रबंध हो चुका है। अगर यही सब सिद्धू के साथ भी होता है तो यह बड़ी बात होगी, क्योंकि जिस तरह कांग्रेस अंदर खींच तान चल रही है, उस स्थिति में सिद्धू के साथ सभी नेताओं को खड़े होने में मुश्किल महसूस हो सकती है।

ट्रम्प की तरह सिद्धू और इमरान
सिद्धू और इमरान यूं तो अलग-अलग राजनीति के माहिर हैं परन्तु कुछ मामलों में दोनों का काम करने का तौर-तरीका एक ही सा है। अगर दोनों नेताओं की राजनीति को गौर से देखा जाए तो यह दोनों अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अपेक्षा कम नहीं। जिस तरह ट्रम्प अमरीका की बजाय खुद को ज्यादा ध्यान देते रहे हैं, किसी संगठन प्रति आस्था की बजाय खुद को ज्यादा वेल्यु देना ट्रम्प की प्रकृति रही है। इसी तरह की आदत इमरान और सिद्धू में देखी गई। 1996 में इमरान ने पाकिस्तान में तहरीक-ए-इन्साफ संगठन का गठन किया था। खुद को इस पार्टी का सब कुछ बनाए रखा, कुछ इसी तरह का माहौल सिद्धू अपने आसपास बनाए रखना बेहतर समझते हैं। खुद को बाकियों से ऊपर रखने की उनकी सोच काफी हद तक ट्रम्प के साथ मिलती है। 

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News Editor

Urmila

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