वृद्धाश्रम में मनाया 100वां जन्मदिनः बच्चे होने के बावजूद अकेले व्यतीत कर रहे हैं जीवन

11/12/2019 9:38:52 AM

जालंधर(खुराना): 2 पुत्र और एक बेटी होने के बावजूद जीवन की संध्या अकेले में व्यतीत कर रहे राजेन्द्र नाथ खन्ना ने गत 7 नवम्बर को अपना 100वां जन्मदिन स्थानीय गुलाब देवी अस्पताल परिसर में चल रहे लाला जगत नारायण मैमोरियल ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में मनाया। इस उम्र में भी श्री खन्ना दिनचर्या का सारा काम खुद करते हैं। अपनी लम्बी उम्र के लिए उन्होंने अपनी सादगी को कारण बताया व कहा कि वह प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि अगर लम्बी उम्र देना तो खुद भी ध्यान रखना। 

गौरतलब है कि राजेन्द्र नाथ खन्ना का जन्म गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) के हाफिजाबाद शहर में हुआ था और उन्होंने 1939 में यूनिवर्सिटी आफ पंजाब (लाहौर) से मैट्रिक की, बाद में वह सैंट्रल बैंक में नौकरी करने लगे और विभाजन के पश्चात अमृतसर में आ बसे। यहां भी उन्हें सैंट्रल बैंक आफ इंडिया में नौकरी पर रख लिया गया और वह अधिकारी पद से रिटायर्ड हुए। 

खन्ना ने बताया कि उनका बड़ा बेटा सुनील खन्ना सैंट्रल बैंक आफ इंडिया से रिटायर्ड है और अब दिल्ली में रहता है, परंतु कभी-कभार राजा गार्डन (मिट्ठापुर) स्थित अपने फ्लैट में आता है, तब उन्हें भी वृद्धाश्रम आकर मिल जाता है। दूसरा बेटा विजय खन्ना विक्रमपुरा में रहता है और उससे उनकी बोलचाल नहीं है क्योंकि वह एक दबंग कांग्रेसी नेता की धौंस देता रहता है। बेटी वर्षा सेठ को लेकर श्री खन्ना के मन में मलाल व गुस्सा भी दिखा परंतु साथ ही उन्होंने कहा कि अब वह उनका किराया व खर्चा आदि देती है और अक्सर मिलने आती है। राजेन्द्र नाथ खन्ना, जिन्होंने 17 जून, 2017 को वृद्धाश्रम में एंट्री ली, आज भी पूरे एक्टिव दिखते हैं परंतु उन्हें सुनाई न देने की गंभीर समस्या आ गई है। फिर भी पुराने समय को याद करके उनकी आंखों में चमक आ जाती है। 

विभाजन के बाद लॉकर खोलने पाकिस्तान भी गए थे
इस दौरान राजेन्द्र नाथ खन्ना ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि पाकिस्तान में जब वह सैंट्रल बैंक में नौकरी करते थे तब उनके भाई लै. कर्नल बी.एन. खन्ना का कीमती सामान भी उनके लॉकर में जमा था। 1947 में बंटवारे के बाद सब कुछ छोड़कर सभी अमृतसर चले आए, परंतु पाकिस्तान बनने के बाद वह अपना बैंक लॉकर खोलने लाहौर गए व वहां से कीमती सामान निकाल कर लाए। नौकरी व शेयर बिजनैस करते हुए उन्होंने जो 40-50 लाख रुपए इकट्ठे किए, वह उनकी संतान ने ही हड़प लिए। 
 


Edited By

Sunita sarangal

Related News