खस्ता हालत में होने के बावजूद 108 एंबुलेंस सेवा बचा रही "जिंदगी", सरकार नहीं उठा रही कारगर कदम

punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2020 - 05:01 PM (IST)

अमृतसर (दलजीत शर्मा):  सेहत सेवाओं की बेहतरी के लिए 10 साल पहले राज्य सरकार की पहल पर शुरू की गई डायल 108 एंबुलेंस सेवा खस्ता हाल हो चुकी हैं। इसके चलते जहां काम प्रभावित होता है वहीं लोगों की जान का भी जोखिम बना रहता है। यह चलने से जवाब दे चुकी हैं। हालांकि संचालक कंपनी इन्हीं से जैसे-तैसे काम चला रही है लेकिन सरकार इस तरफ गंभीर नहीं है, जो लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।

जानकारी अनुसार साल 2010 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के दौर में अमृतसर समेत राज्य के हर जिले के लिए कुल 242 डायल 108 गाड़ियां उतारी गई थीं। इनका काम एक्सीडेंट, डिलिवरी, बर्न मामले, हार्ट अटैक जैसे इमरजेंसी के मरीजों को अस्पताल पहुंचाना रहा है, ताकि उनको समय से इलाज मिल सके।

कंपनी के स्टेट हेड सैकत मुखर्जी मुखर्जी ने बताया कि 10 सालों में एक-एक गाड़ी ने औसतन 4.5 से 5.0 लाख किमी का सफर तय किया है, जबकि इनकी मियाद 2.5 से 3.0 लाख किमी होती है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी स्थिति कैसी होगी। वह बताते हैं कि मरीजों को दिक्कत नहीं आने दी जाती, क्योंकि अगर कोई गाड़ी खराब होती है तो तत्काल दूसरी भेज दी जाती है लेकिन इससे समय तथा मैन पावर दोनों की बर्बादी होती है। 

अभी तक 2126292 लोगों की बचा चुकी है जान

पंजाब में 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा अपनी अहम भूमिका निभा रही है 10 वर्षों में सेवा द्वारा 21 लाख 26 हजार 292 लोगों को आपत्कालीन समय में सहायता करके उनकी जान बचाई गई है सेवा के के अधिकारी मुखर्जी ने बताया कि सांप तथा अन्य एनिमल के काटने वाले 1963,केमिकल एक्सीडेंट तथा आग से सड़े 10856 दिल के रोग की इमरजेंसी सेवाओं में 33186 किसान दुर्घटनाओं में 33749 जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में 294 342 मेडिकल इमरजेंसी में 287631 अन्य में 58601 लोगों की गिनती जान बचाई गई है इसी तरह गर्भवती महिलाओं के 648583 रोड एक्सीडेंट में एक 93725 स्यूटिकल केस में 3065 टोमा केस में 30593 लोगों को समय पर बेहतर सेहत सेवाएं दी गई है इसके अलावा ऑन बोर्ड डिलीवरी में  2702 मरीजों को लाभ दिया गया है।  उन्होंने बताया कि कंपनी द्वारा हमेशा लोगों को अच्छी सेवाएं देने के लिए काम किया जाता रहेगा। 


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Edited By

Tania pathak

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