ब्यास दरिया में सरवे के दौरान देखी गई 2 बड़ी और एक छोटी डालफिन

10/21/2019 12:15:37 PM

तरनतारन (रमन): अमृतसर-बठिंडा हाईवे पर जिला तरनतारन और फिरोजपुर की सरहद पर 86 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैले हरीके पत्तन दरिया में मौजूद दुर्लभ पाई जाने वाली डालफिन मछलियों की गिनती का सरवे मुकंमल हो गया है। यह सरवे हर साल की तरह वर्ल्ड वाइलड लाइफ फंड और जंगलात विभाग के सांझे आपरेशन द्वारा 16 से 18 अक्तूबर को 16 मेंबरी टीम द्वारा पूरा किया गया है।

इस सबंधी जानकारी देते हुए हरीके वैटलैंड में वर्ल्ड वाइलड लाइफ फंड के मैडम गीतांजलि ने बताया कि हर साल की तरह ब्यास दरिया में मौजूद डालफिन मछलियां जिनकी पिछले साल 10 से कम की गिनती का अनुमान लगाया गया था का इस साल दोबारा सरवे पूरा किया गया है। इस सरवे में 2 बड़ी मोटर बोट की मदद से 16 मेंबरी टीम द्वारा 3 दिनों में 2 बड़ी डालफिन व एक बच्चा देखा गया। इन 3 डालफिन को ब्यास दरिया के साथ लगते गांव घड़का और करमूवाल में देखा गया है। उन्होंने बताया कि यह सरवे चीफ वाइलड वार्डन चंडीगढ़ कुलदीप कुमार के हु्कमों तहत किया गया है।

मैडम गीतांजलि ने बताया कि पिछले साल एक शराब की फैक्टरी द्वारा दरिया ब्यास में छोड़े गए जहरीले शीरे के कारन बड़ी मात्रा में मछलियां और पानी में रहने वाले ओर जीव मर गए थे। जिसके बाद फैक्टरी मालिक पर पंजाब सरकार की ओर से सखत कदम उठाते हुए जहां कानूनी कार्रवाई की गई थी, वहीं इस इलाके में कई महीनों तक मछलियों को पकड़ने के ठेकों पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। इस जहरीले शीरे के कारन हुए जीवों को हुए नुक्सान को देखते हुए उनकी टीमें समय-समय पर पानी में मौजूद डालफिन व दूसरे जीवों की देखरेख कर रही हैं और शरारती अनसरों पर भी नजर रखी जा रही है। साथ ही में उन्होंने यह भी बताया कि इस दरिया के पानी के सैंपल लेकर जांच भी करवाई जाती है कि इस पानी में कोई जहरीला पद्यार्थ तो नहीं मिला हुआ। उन्होंने बताया कि इस इलाके में ओर डालफिन भी हो सकती हैं। अभ तक टीम की ओर से किए गए सरवे के दौरान सिर्फ 3 डालफिन को ही देखा गया है।


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