दुबई-कतर जाने वाली सभी उड़ानें रद्द, अमृतसर एयरपोर्ट पर यात्रियों ने किया हंगामा
punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 04:03 PM (IST)
अमृतसर (इंद्रजीत): पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच शुरू हुई खूनी जंग के बादल पंजाब के अंतर्राष्ट्रीय हवाई संपर्क टुटने से भयंकर स्थिति पैदा हो गई है। अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से खाड़ी को संचालित होने वाली लगभग सभी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को निलंबित या रद्द कर दिया गया है, जिससे आज हवाई अड्डे पर यात्री मायूस व परेशान नजर आए। बता दें कि ईरान/इजरायल के युद्ध ने अचानक ही न केवल विश्व के सभी देशों का ध्यानाकर्षण एक तरफ कर दिया है, बल्कि इसे हर फील्ड के साथ जोड़ा जा रहा है, क्योंकि युद्ध न केवल हथियारों की लड़ाई होती है, बल्कि इसका उन चीजों पर भी असर होता है, जो सामान्य लोग उनके व्यवसाय/कारोबार से रसोई के चूल्हे तक पहुंचता है। हालांकि मुख्य चर्चा का विषय इस युद्ध के वहीं पात्र हैं, जो दोनों तरफ से पाक्षीय तौर पर किसी पलड़े में शामिल हो चुके हैं या होने वाले हैं, लेकिन दूसरी तरफ इस युद्ध का पूरे विश्व पर ही ‘कहीं न कहीं’, ‘कोई न कोई’ प्रभाव तो चलता ही है, जो हर किसी की विचारधारा का विषय बना हुआ है।
खाड़ी देशों से संपर्क टूटा
अमृतसर हवाई अड्डे से सबसे अधिक उड़ानें दुबई, शारजाह और दोहा जैसे खाड़ी देशों के लिए संचालित होती हैं। जानकारी के अनुसार ईरानी हवाई क्षेत्र के असुरक्षित होने के कारण इंडिगो की अमृतसर-शारजाह, एयर इंडिया एक्सप्रैस की अमृतसर-दुबई और कतर एयरवेज की दोहा-अमृतसर उड़ान को अचानक रद्द करना पड़ा। इन उड़ानों के रद्द होने से उन हजारों पंजाबी कामगारों और पर्यटकों की योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिन्होंने महीनों पहले टिकट बुक करवाई थीं।
यात्रियों की परेशानी और हवाई अड्डे पर हंगामा
हवाई अड्डे के टर्मिनल पर सुबह से भारी भीड़ देखने को मिली। कई यात्री दूर-दराज के गांवों से टैक्सी लेकर पहुंचे थे, लेकिन यहां आकर पता चला कि उनकी उड़ान रद्द हो चुकी है। एयरलाइंस की ओर से अंतिम समय पर दी गई सूचना के कारण यात्रियों और स्टाफ के बीच तीखी बहस भी हुई जिससे हवाई अड्डे पर हंगामा हो गया। बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों के लिए स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है, क्योंकि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि उड़ानें कब बहाल होंगी।
लंबे रूटों पर किराए में बढ़ौत्तरी
सूत्रों के अनुसार जिन उड़ानों को डायवर्ट किया गया है, उनके सफर का समय 2 से 3 घंटे बढ़ गया है। मार्ग बदलने से ईंधन की खपत बढ़ने का सीधा असर टिकटों की कीमतों पर पड़ रहा है। दिल्ली के रास्ते जाने वाली कई कनेक्टिंग उड़ानों (लंदन, न्यूयॉर्क) के किराए में अचानक 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ौत्तरी हो गई है, जिससे मध्यम वर्गीय यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
घरेलू उड़ानें सुरक्षित : निदेशक भूपेंद्र सिंह
अमृतसर हवाई अड्डे के निदेशक भूपेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि युद्ध के कारण केवल अंतर्राष्ट्रीय रूट प्रभावित हुई हैं। हमारी घरेलू उड़ानें जैसे दिल्ली, मुंबई, पुणे और श्रीनगर के लिए विमान पहले की तरह नियमित समय पर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि हवाई अड्डे पर आने से पहले संबंधित एयरलाइन से उड़ान की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।
पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका
अमृतसर एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। विदेशी उड़ानें बंद होने से स्थानीय होटल व्यवसायियों और टैक्सी चालकों का काम भी प्रभावित हुआ है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो अमृतसर की अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें ईरान और इज़राइल की स्थिति पर टिकी हैं। यात्री उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही हवाई मार्ग फिर से खुलेंगे और उनकी दिनचर्या सामान्य होगी।
कारोबारियों का सताने लगी डर, तेल कीमतें बढ़ी तो पंजाब के व्यापार पर चुनौती
इस संबंध में पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महामंत्री समीर जैन ने कहा कि हाल ही में ईरान, अमेरिका व इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर चिंता में डाल दिया है। यह स्थिति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत सहित पंजाब के व्यापार और उद्योग पर पड़ सकता है। उन्होंने व्यापारी और कारोबारी समूह इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा चलता है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में खलबली पैदा कर सकता है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का लगभग 80 फीसदी से अधिक आयात करता है, और यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो पैट्रोल, डीज़ल, परिवहन लागत तथा उत्पादन खर्च में व्यापक वृद्धि होगी।
युद्ध से ये पड़ सकता है असर
-कच्चे तेल के दाम बढ़ने से परिवहन महंगा होगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं, खाद्यान्न, प्लॉस्टिक, स्टील, रसायन और उपभोक्ता उत्पादों की लागत बढ़ेगी। पंजाब का उद्योग विशेष रूप से प्लॉस्टिक, स्टील, साइकिल, कृषि उपकरण, होजरी और खाद्य प्रसंस्करण पर आधारित है, जिनकी लागत संरचना सीधे ऊर्जा कीमतों से जुड़ी है।
-खाड़ी देशों में अस्थिरता के कारण शिपिंग रूट प्रभावित हो सकते हैं। इससे फ्रेट-चार्ज बढ़ सकता है व निर्यात में देरी इसका साइड इफैक्ट है। पंजाब लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे औद्योगिक नगर व निर्यातक, खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।
-अंतर्राष्ट्रीय तनाव से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे भारतीय रुपये पर विपरीत दबाव बनेगा जिससे आयात महंगा व विदेशी संतुलन हमारे कारोबारों के विपरीत होगा।
-बढ़ती ऊर्जा लागत से महंगाई दर में वृद्धि संभावित है, जिससे उपभोक्ता की क्रय शक्ति घटेगी और बाजार में मांग कम हो सकती है।
युद्ध के दौरान जनता को कई संभावित मुश्किलों से होना होगा सतर्क
यह युद्ध ईरान और इसराइल के बीच हो रहा है, लेकिन फिर भी आवागमन के लिए लोकल और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर फर्क दिखाई दे रहा है। हालांकि विमानपत्तन प्राधिकरण के अधिकारी एवं सभी इस पर नजर रखे हुए हैं और सीधे तौर पर यह मुश्किलें अभी सामने नहीं है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय रूटों के डिस्टर्ब होने के कारण कई उड़ानों को उनके गंतव्य अथवा वापसी पर डाइवर्ट करने की सूचनाएं तो मिल ही रही हैं और यह भी कोई हवाई यात्रियों के लिए साधारण मुश्किलों भरा सफर नहीं है। इस संबंध में सिविल डिफैंस अमृतसर के चीफ वार्डन प्रो. सुरजीत शर्मा ने कुछ विशेष अंश प्रस्तुत किए हैं, जो उन्होंने अपने 55 वर्ष के कार्यकाल के दौरान भारत पाक और चीन जंगों में अपने अनुभव के अनुसार प्राप्त किए हैं ।
-युद्ध के दौरान शहर में सुरक्षा की स्थिति खराब हो सकती है, इसके लिए लोकल प्रशासन को सख्त रहने की जरूरत है।
-युद्ध के कारण शहर में भोजन और पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे लोगों को भूखमरी और प्यास का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम में अंकित व संबंधित विभाग सतर्क रहे।
-विमान कि उड़ने डायवर्ट होने पर अज्ञात यात्रियों की सुरक्षा हेतु टैक्सी चालकों पर निगाह रखनी होगी।
-युद्ध के कारण शहर में बिजली और ईंधन की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे लोगों को अंधेरे और ठंड में रहना पड़ सकता है। उनके बचाव के लिए पुलिस और सूचना तंत्र सजग होने चाहिए।
-युद्ध के कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचार व्यवस्था/नेटवर्किंग बाधित हो सकती है, जिससे लोगों को अपने निकटवर्ती और मददगार जनों से संपर्क करने में मुश्किल हो सकती है। इसके लिए सिविल डिफैंस वार्डन सर्विस की काफी अहमियत है।
- शहर में आवागमन बाधित हो सकता है, जिससे अज्ञात भाई से ट्रैफिक संचालन बाधित होने के चलते लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में मुश्किल हो सकती है।
-युद्ध के कारण शहर में चिकित्सा सुविधाएं बाधित हो सकती हैं, संबंधित स्वास्थ्य पर शासन सतर्क रहे।
-इन होलियों के दिनों में लोग घरों से बाहर जाने का टूरिंग प्रोग्राम कम बनाएं।
इन मुश्किलों से निपटने के लिए आम जनता को सरकार और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए और सुरक्षित स्थानों पर रहने की कोशिश करनी चाहिए।
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