पंजाब कांग्रेस में बड़ी घात लगाने की तैयारी में भाजपा

punjabkesari.in Tuesday, May 24, 2022 - 10:55 AM (IST)

चंडीगढ़ (हरिशचंद्र): पंजाब कांग्रेस के बेहद संजीदा नेताओं में शुमार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व विधायक सुनील जाखड़ को अपने खेमे में जोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब कांग्रेस में बड़ी घात लगाने की तैयारी में है। बीते साल कैप्टन अमरेंद्र कांग्रेस के पंजाब में मुख्यमंत्री थे जबकि सुनील जाखड़ प्रदेश अध्यक्ष। मगर साल भर से भी कम समय में इन दोनों को कांग्रेस ने अपनी अंदरूनी राजनीति और कुछ नेताओं को ‘खुश’ करने व उनकी ‘ईगो संतुष्ट’ करने के फेर में न केवल गंवा दिया बल्कि भाजपा के खेमे में जाने को भी मजबूर कर दिया।

इनमें भी कैप्टन ने तो तुरंत पलटवार किया था मगर जाखड़ अपने स्वभाव के मुताबिक शांत होकर बैठ गए थे लेकिन अनुशासनहीनता के नाम पर थमाए गए कारण बताओ नोटिस को अपने आत्म-सम्मान से जोड़ कर उन्होंने नोटिस का जवाब भेजने की बजाय भाजपा में शामिल होकर करारा जवाब कांग्रेस को दे डाला। यह सिलसिला फिलहाल थमने वाला नजर नहीं आता। सूत्रों की मानें तो अगले कुछ दिनों में पंजाब से कई ऐसे नेता भाजपा में नजर आएंगे, जो कांग्रेस में किनारे किए गए हैं। इनमें किसी की पंजाब के मौजूदा नेतृत्व से नहीं पट रही जबकि किसी को चुनाव के समय वरिष्ठता के बावजूद टिकट को लेकर भारी निराशा व अपमान झेलना पड़ा था। इस कड़ी में मालवा और दोआबा के कुछ बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं, जिनमें पूर्व कैबिनेट मंत्री तक शामिल हैं। 

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के एक पूर्व विधायक भी भाजपा में जाना चाहते हैं, जिन्हें कैबिनेट रैंक का रुतबा हासिल रहा है। दोआबा के एक पूर्व सांसद भी भाजपा के संपर्क में बने हुए हैं। इनमें से एक नेता फिलहाल विदेश में हैं और उनकी स्वदेश वापसी पर भाजपा में शामिल होने का कार्यक्रम तय है।

रंधावा-वड़िंग के बयानों से पार्टी का डर सामने आया
सुनील जाखड़ द्वारा कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने के साथ ही जिस तरह से उनके खिलाफ पंजब कांग्रेस प्रधान अमरिंद्र सिंह राजा वडिंग और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखजिंद्र सिंह रंधावा ने मोर्चा खोला है, उससे साफ जाहिर हो गया था कि जाखड़ के जाने से पंजाब कांग्रेस में खलबली मच गई है। खास बात यह है कि रंधावा ने बीते साल यहां तक कहा था कि उन्हें कैप्टन सरकार में मंत्री सुनील जाखड़ ने बनवाया था। लेकिन अब उनके सुर एकाएक बदल गए हैं। पार्टी हाईकमान अपने असंतुष्ट नेताओं को बांधे रखने के लिए जाखड़ पर पंजाब के कांग्रेस नेताओं के जरिए निशाने साध रही है ताकि बाकी नेता भाजपा में जाने से गुरेज करें।

महासचिव पंजाब भाजपा डा. सुभाष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपनी पार्टी के पुनर्जीवित होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। जिस तरह का मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व है और जैसे कांग्रेस का डाऊनफाल चल रहा है, उसे देखते हुए कांग्रेसियों को लग रहा है कि उनका कांग्रेस में कोई भविष्य नहीं है। कांग्रेस अब पंजाब में आम आदमी पार्टी को टक्कर नहीं दे सकती। दूसरी ओर अकाली दल की भी हालत खराब ही है। भाजपा एक बड़ी व मजबूत पार्टी है, देश की जनता ने उसे केंद्र की सत्ता सौंपी है। ऐसे में पंजाब में वह आम आदमी पार्टी को न केवल टक्कर दे सकती है बल्कि बढ़िया विकल्प भी बन कर उभर सकती है इसलिए लोग भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं। 

इन कांग्रेसियों के जनाधार को मापकर ही इन्हें शामिल करना चाहती है भाजपा
खास बात यह है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के समय सबसे बड़ी सेंधमारी भाजपा ने ही की थी, जब विधायक राणा गुरमीत सोढी व फतेहजंग बाजवा, पूर्व विधायक अरविंद खन्ना व गुरतेज सिंह और जगदेव सिंह आदि कई पूर्व विधायक-सांसद आदि कांग्रेस और अकाली दल छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे लेकिन अब भाजपा के साथ संपर्क में चाहे कई कांग्रेसी हों लेकिन पार्टी काफी सोच-विचार करके ही ऐसे नेताओं के कद और उनकी पकड़ को देखकर ही उन्हें शामिल करने के मूड में है। 
वह नहीं चाहती कि ऐसे नेता उनकी पार्टी पर बोझ बनें। लोकसभा चुनाव में पूरे दो साल और विधानसभा चुनाव में साढ़े 4 साल से अधिक का समय है। चूंकि अभी चुनाव बहुत दूर हैं, इसलिए भाजपा किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। वह लोकसभा और विधानसभा हलकों में इन कांग्रेसियों के जनाधार को मापकर ही इन्हें शामिल करना चाहती है।

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News Editor

Urmila

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