बठिंडा में ILETS टीचर की मौ+त मामले में खुलासा, 4 पुलिसकर्मी दोषी

punjabkesari.in Monday, Sep 21, 2026 - 03:35 PM (IST)

बठिंडा(विजय वर्मा): बठिंडा के 34 वर्षीय ILETS टीचर नरिंदरदीप सिंह की मौत का मामला अब पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मई 2025 में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की न्यायिक जांच में तत्कालीन CIA-2 के चार पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर निष्कर्ष सामने आए हैं।  बठिंडा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभजोत भट्टी की 18 पन्नों की रिपोर्ट में नरिंदरदीप को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखकर प्रताडि़त किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में शरीर पर चोटों और गवाहों के बयानों के आधार पर मौत से पहले पुलिस हिरासत में यातना के संकेत बताए गए हैं।

रिपोर्ट में संवेदनशील अंगों पर बिजली के झटकों का जिक्र
न्यायिक जांच रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू शरीर पर चोटों के निशान और बिजली के झटके दिए जाने से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों की कड़ी कथित तौर पर इस ओर इशारा करती है कि नरिंदरदीप को सीआईए-2 के कर्मचारियों ने हिरासत के दौरान शारीरिक रूप से प्रताडि़त किया। रिपोर्ट में सिर और जननांग समेत संवेदनशील हिस्सों पर बिजली के झटके दिए जाने का भी उल्लेख है। यह निष्कर्ष गवाहों के बयानों, चिकित्सकीय और दस्तावेजी साक्ष्यों को एक साथ देखने के बाद दर्ज किया गया है।

पहले सड़क हादसा बताया, शव देखा तो खुला शक
गोनियाना निवासी नरिंदरदीप सिंह 23 मई 2025 को शहीद भाई मणि सिंह सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार को शुरुआत में उसकी मौत सड़क हादसे में होने की जानकारी दी गई, लेकिन अस्पताल में शव देखने के बाद शरीर पर चोटों के निशान देखकर परिजनों को पुलिस की बताई कहानी पर संदेह हुआ। इसके बाद उसके दोस्त गगनदीप सिंह ने 24 मई को सामाजिक माध्यम पर वीडियो जारी कर सीआईए टीम पर दोनों को हिरासत में लेकर मारपीट करने के आरोप लगाए।

फिरोजपुर से लौटते समय सीआईए ने रोका था
जांच के अनुसार नरिंदरदीप और उसका दोस्त गगनदीप किसी वित्तीय लेन-देन के सिलसिले में फिरोजपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान सीआईए स्टाफ ने उन्हें रोका और कथित नशीली दवाओं की तस्करी के संबंध में पूछताछ की। मामले की फाइल के अनुसार उस समय दोनों से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। गगनदीप ने बाद में आरोप लगाया कि पुलिस ने उस पर नरिंदरदीप की मौत को सड़क हादसा बताने के लिए परिवार के सामने वही कहानी रखने का दबाव बनाया।

एम्स ने बताई नशीले पदार्थों से श्वसन विफलता, जांच ने चोटों को भी माना अहम
इस मामले में एम्स बठिंडा के चिकित्सकीय बोर्ड ने मौत का कारण ओपिएट्स और बेंजोडायजेपीन के संयुक्त विषैले प्रभाव से हुई श्वसन विफलता बताया था। लेकिन न्यायिक जांच केवल चिकित्सकीय बोर्ड की राय तक सीमित नहीं रही। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गवाहों के बयान, शरीर पर चोटों के निशान और दस्तावेजी साक्ष्यों को भी जांच का आधार बनाया। रिपोर्ट में सड़क हादसे की कहानी को उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मेल न खाने वाला बताया गया है और कहा गया है कि हादसे अथवा नशीली दवाओं की अधिक मात्रा की कहानी कथित रूप से आरोपियों को बचाने के लिए गढ़ी गई थी।

सहायक उपनिरीक्षक समेत चार सीआईए कर्मी घेरे में
न्यायिक जांच में तत्कालीन सीआईए-2 के सहायक उपनिरीक्षक अवतार सिंह उर्फ तारी, हेड कांस्टेबल लखविंदर सिंह, हेड कांस्टेबल हरविंदर सिंह और सीनियर कांस्टेबल गुरपाल सिंह की भूमिका पर गंभीर निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 8 अगस्त 2025 को बठिंडा के सत्र न्यायाधीश ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभजोत भट्टी ने 1 सितंबर 2026 को जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी। एक साल से अधिक समय बाद सामने आई न्यायिक जांच ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है। जिस मौत को शुरुआत में सड़क हादसे और बाद में नशीले पदार्थों के प्रभाव से जोड़कर देखा गया था, उसी मामले में न्यायिक जांच ने कथित अवैध हिरासत, शारीरिक यातना और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल दर्ज किए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आगे क्या कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई होती है।


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Vatika

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