Punjab में गहराता जा रहा संकट : घर बनाना होगा और महंगा! बंद होने के कगार पर ईंट-भट्ठें

punjabkesari.in Wednesday, Jun 17, 2026 - 12:27 PM (IST)

नवांशहर (त्रिपाठी): मिट्टी की लगातार बढ़ती कीमते तथा कम हो रही उपलब्धता सहिर पेश आ रही अन्य चुनौतियों के चलते पंजाब भर में ईट भट्ठों का अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। यही कारण है कि पंजाब भर चलने वाले ईट भट्ठों की गिनती जहा 3 हजार से लुढ़क कर साढ़े 1400 के करीब रह गई है तो वही जिले में भी चलने वाले 72 ईट भट्ठों में से आधे से अधिक 39 भट्ठें बंद हो चुके है। एक भट्ठा मालिक ने बताया कि यदि भट्ठों के संचालन में लगातार चुनौतियों में इजाफा होता रहा तो भट्ठा मालिकों के लिए इसका अस्तित्व बनाए रखना आसान नही होगा।

माइनिंग रेट बढ़ने तथा मिट्टी की उपलब्धता न होने से ईंटों के रेट में हो रही लगातार बढ़ौतरी

डिस्ट्रिकट नवांशहर ब्रिक किलन आनरज एसोसिएशन के प्रधान अशोक लडोईया ने बताया कि पहले मिट्टी की माइनिंग का ठेका करीब 60 हजार रुपए में मिल जाता था। परन्तु अब करीब 2 एकड़ मिट्टी की माइनिंग का ठेका 2.18 लाख में मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मिट्टी के रेट पहले की तुलना में करीब 4 गुणा बढ़ चुके है और जहां तक कि ईंटे बनाने के लिए अनिवार्य मिट्टी पाने के लिए 60-70 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। इसी तरह से मई दिवस से लेबर के रेटों में भी बेतहाशा बढ़ौतरी हुई है। उन्होंने बताया कि अब प्रति एक हजार ईंटों पर 600 रुपए का खर्च बढ़ा है।

कोयले पर बढ़ी 10 प्रतिशत जी.एस.टी. से दामों में 9 हजार तक हुई बढ़ौतरी

डिस्ट्रिकट नवांशहर ब्रिक किलन आनर्ज एसोसिएशन के प्रधान ने बताया कि पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जी.एस.टी. थी जिसे बढ़ा कर अब 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यही कारण है कि कोयले का रेट 13 हजार से बढ़ कर 21-22 हजार तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से भट्ठों पर पराली का भूसा जलाना अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ईंटों को पकाने के लिए 30 प्रतिशत भूसे का उपयोग करना अनिवार्य है जिसे हर वर्ष 10 प्रतिशत बढ़ाया जाना है। उन्होंने बताया कि कोयले के मुकाबले में भूसे की सी.वी. कम होती है। डिस्ट्रिकट नवांशहर ब्रिक किलन आनरज एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि ईंट भट्टा उद्योग जिससे लाखों परिवारों का रोजगार जुड़ा हुआ है, के उत्पादन को बनाएं रखने के लिए ईंट-भट्ठा उद्योग के पक्ष वाली नीतियों को अमल में लाने की जरूरत है।

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News Editor

Urmila

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