जनगणना ड्यूटी में ज्वाइन न करने वाले अध्यापकों पर निगम सख्त, सैलरी रोकने की सिफारिश
punjabkesari.in Monday, May 25, 2026 - 02:18 PM (IST)
लुधियाना (विक्की): जनगणना ड्यूटी के लिए रिपोर्ट न करने वाले शिक्षा विभाग के अध्यापकों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नगर निगम ने जिला शिक्षा अधिकारी (डी.ई.ओ.) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से निगम ने गैर-हाजिर स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है। डी.ई.ओ. (सैकेंडरी और एलीमैंट्री) को लिखे गए पत्र में नगर निगम ने सिफारिश की है कि जिन अध्यापकों और कर्मचारियों ने जनगणना ड्यूटी के लिए अभी तक रिपोर्ट नहीं की है, उन्हें उनके संबंधित स्कूलों में भी गैर-हाजिर (एब्सैंट) दिखाया जाए। इसके साथ ही पत्र में यह भी सिफारिश की गई है कि संबंधित जनगणना अधिकारी द्वारा एन.ओ.सी. जारी किए जाने तक इन अध्यापकों और कर्मचारियों की सैलरी भी रोक दी जाए।
नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि जनगणना एक बेहद महत्वपूर्ण और टाइम बाऊंड सरकारी काम है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन होने की सूरत में विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी जिसके लिए संबंधित स्कूल प्रिंसीपल और कर्मचारी खुद पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे लेकिन इसके बावजूद कुछ अध्यापकों और कर्मचारियों ने जनगणना ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं की। अधिकारियों ने अपील करते हुए कहा कि यह एक राष्ट्रीय ड्यूटी है और अध्यापकों व कर्मचारियों को तुरंत इस ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करनी चाहिए। अभी भी रिपोर्ट न करने वाले स्टाफ के खिलाफ आने वाले दिनों में सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अपनों पर मेहरबानी और दूसरों पर कड़ाई
इस पूरे मामले का एक दूसरा पहलू बेहद चर्चा में है जो अंदरूनी सिस्टम के दोहरे मापदंडों की पोल खोल रहा है। एक तरफ जहां ड्यूटी पर न पहुंचने वाले अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निगम पत्र लिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ अध्यापक संगठनों द्वारा पहले दिन से ही गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अध्यापकों का सीधा आरोप है कि जनगणना ड्यूटी लगाने वाले नगर निगम के ही कुछ अधिकारियों ने अपने चहेते कर्मचारियों को इस ड्यूटी से पहले ही अलग कर दिया या उनकी ड्यूटियां काट दीं।
अब क्रैडिबिलिटी का यह बड़ा रोचक सवाल गूंज रहा है कि जिन लोगों की ड्यूटियां खुद नगर निगम के अधिकारियों ने काटी हैं, उन पर कार्रवाई की गाज आखिर किस पर गिरेगी? अध्यापकों का कहना है कि अगर यह एक नैशनल ड्यूटी है तो नियम सबके लिए एक समान होने चाहिएं। अपने करीबियों को बैकडोर से फायदा देकर ड्यूटी से मुक्त रखना और आम अध्यापकों की सैलरी रोकने की सिफारिश करना सीधे तौर पर भेदभाव है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपने ही विभाग के उन अफसरों पर कोई जांच बैठाता है जिन्होंने चहेतों को फायदा पहुंचाया, या फिर हमेशा की तरह केवल अध्यापकों पर ही गाज गिरेगी।
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