पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भ्रष्टाचार का खुला खेल! कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा लोगों पर
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 04:39 PM (IST)
लुधियाना (राम): पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) का उद्देश्य राज्य में पर्यावरण की रक्षा करना और प्रदूषण पर नियंत्रण रखना है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। पंजाब के कई शहरों और औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खुद सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ चुका है कि यह संस्था उन नियमों की ही उल्लंघना करने लगी है जिन्हें लागू करने का जिम्मा उसके ऊपर है।
सूत्रों का कहना है कि पी.पी.सी.बी. की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है। जिन उद्योगों और इकाइयों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ये इकाइयां खुलेआम जहरीला पानी नालों में छोड़ रही हैं या बिना अनुमति के चल रही हैं, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं, छोटे और मंझले उद्योगों को बार-बार नोटिस और जुर्माना लगाया जाता है और कई बार बिना ठोस कारण के इन इकाइयों को सील कर दिया जाता है।
स्थानीय उद्योगपतियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई अधिकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्हें फील्ड में जाकर इकाइयों का निरीक्षण करना चाहिए, लेकिन वे अधिकांश समय दफ्तरों में बैठे रहते हैं। केवल उन्हीं मामलों में फील्ड विज़िट होती है, जहां पहले से तय होता है कि किसे परेशान किया जाएगा और किसे छोड़ दिया जाएगा। इससे प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां बिना किसी डर के काम करती रहती हैं।
लुधियाना समेत कई शहरों में बुड्ढा नाला प्रदूषण का सबसे बड़ा उदाहरण है। इलैक्ट्रो प्लेटिंग यूनिट, डाइंग यूनिट और कैमिकल फैक्ट्रियां बिना किसी ट्रीटमैंट के अपना गंदा पानी नाले में छोड़ रही हैं। नाले का पानी काला और बदबूदार हो चुका है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।
इसके अलावा, घरों में चल रही अवैध वॉशिंग यूनिट्स भी गंभीर समस्या बन चुकी हैं। इनसे निकलने वाला कैमिकल युक्त पानी नालियों और जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल और लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बावजूद इसके, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आखिर कार्रवाई किस आधार पर करता है? क्या यह कार्रवाई नियमों के मुताबिक होती है या फिर राजनीतिक दबाव और निजी हितों के तहत की जाती है? क्या बड़े प्रदूषण फैलाने वालों को जानबूझकर छोड़ा जा रहा है और छोटे उद्योगों से वसूली की जाती है? यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले वर्षों में पंजाब के कई शहरों में हवा, पानी और जमीन सभी जहरीले हो जाएंगे।
स्टाफ की कमी या जानबूझकर बनाई गई व्यवस्था?
पी.पी.सी.बी. में स्टाफ की भारी कमी भी एक गंभीर समस्या बन गई है। कई जिलों में एक ही सुपरिंटैंडिंग इंजीनियर (एस.ई.) और जूनियर इंजीनियर (जे.ई.) पूरे जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिससे नियमित निरीक्षण संभव नहीं हो पाता। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी मजबूरी नहीं बल्कि अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज करने की रणनीति हो सकती है। जब निरीक्षण नहीं होते, तो रिपोर्ट भी नहीं बनती और कार्रवाई की जरूरत भी नहीं पड़ती।
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