अमृतसर में डेयरी उद्योग फिर संकट में, हाईकोर्ट के आदेश से बढ़ी चिंता
punjabkesari.in Monday, Jan 26, 2026 - 01:30 PM (IST)
अमृतसर (जशन, रमन): शहर में डेयरी लघु उद्योग फिर से भारी संकट में है। हाईकोर्ट ने अब वहां से प्रस्थान करने को कह दिया है, जहां भगतांवाला इलाके में 27 वर्ष पहले प्रशासन ने खुद बसाया था। इस संबंध में पत्रकारों से भगतांवाला डेयरी फार्मर एसोसिएशन से संबंधित 100 से अधिक डेयरी मालिकों ने सरकार से दोबारा से न उजाड़ने की गुहार लगाई है।
एसो. के प्रधान सुच्चा सिंह, उप-प्रधान गगनदीप रंधावा, विशाल, नागेश, बाबा पृथ्वी व कई अन्यों ने बताया कि 27 वर्ष पहले सरकार व प्रशासन ने फरमान जारी करके शहर की चारदीवारी के भीतर सभी डेयरियों को बाहर निकालने को कहा था। तब प्रशासन ने खुद ही भगतवांला में शिफ्ट होने को कहा। इस पर हम सबने बड़ी मुश्किल से यहां पर जीमनें खरीदीं और पशु रखे। यहां की डेयिरयां का काम थोड़ा चलने लगा था तो सरकार व हाईकोर्ट के फरमान जारी करके फिर से उन्हें सकते में डाल दिया है। अब प्रशासन फताहपुर जेल के पीछे फतेह सिंह कालोनी के पास जगह पर शिफ्ट होने को कह रहे हैं, परंतु वहां के जमीनों को रेट इतने ज्यादा रखे है कि वे उनकी हद से बाहर है।
प्रधान ने कहा कि वहां (जेल के पीछे इलाके) में बहुत रिहायशी कालोनियां बन रही हैं और कानून ये डेयरियां रिहायशी इलाकों व इसके आस-पास नहीं बननी चाहिए। उन्होंने बताया कि अब फिर से हाईकोर्ट के माध्यम से ही प्रशासन डेयरियां को उन्हें फतेह सिंह कालोनी स्थित सैंट्रल जेल के पीछे कालोनी में शिफ्ट होने को बाध्य कर रही है, जहां पर उघोग से संबंधित सुविधाएं नगण्य है। उन्होंने बताया कि जहां पर अब डेयरियां बनी हुई है, यहां पर कोई भी रिहायशी कालोनी नहीं है और सरकार ने खुद इसे इंड्रस्ट्रियल एरिया घोषित किया हुआ है, परंतु पता नहीं उन्हें यहां के क्यों उजाड़ा जा रहा है।
यहां चारों तरफ भगतांवाला मंडी है, कमर्शियल फैक्टरियां हैं, जबकि प्रशासन फतेह सिंह कालोनी में शिफ्ट होने का कह रहा है, वो जगह तो चारों तरफ से रिहायशी घरों से घिरी हुई है। उन्होंने कहा कि यहां पर डेयरियां होने से किसी भी प्रकार से लोगों को कोई दिक्कत नहीं है। इसके अलावा यहां पर जिस गंदे नाले में गोबर वगैरा जाता है, उसे वो खुद अपने पैसों से साल में दो बार खुद साफ करवाते है।
फतेह सिंह कालोनी में जगह खरीदना उनकी पहुंच से बाहर
उन्होंने कहा कि निगम द्वारा इसके लिए बताई गई फतेह सिंह कालोनी में जगह खरीदने के लिए 12 हजार प्रति गज मूल्य निर्धारित किया गया है, जो उनकी पहुंच से बाहर है। उन्होंने बताया कि कानून अनुसार देखा जो तो एक गाय या भैंस के लिए 12 गज जगह की जरुरत होती है इस तरह अगर 100 गज की जगह भी ली जाए तो कम से कम सवा करोड़ रुपए की जगह बनती है और ऊपर से वो शैड वगैरा बनवाने के लिए भी काफी पैसे लगेंगे, जो उनकी हैसियत से बाहर है। उन्होंने बताया कि उक्त डेयिरयों से आधे से ज्यादा शहर को शुद्ध दूध सप्लाई होता है। इसके अलावा शुद्ध देसी घी भी यही से ज्यादातर बन तक जाता है, परंतु इस फरमान से वो परेशानी में जी रहे हैं कि वो करे भी तो क्या करें। इस फरमान से लोगों को भी परेशानी से जूझना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने निगम कमिस्नर को इस बाबत मिलकर सारी स्थित से अवगत करवाया है।
अदालत में दोबारा याचिका करेंगे दायर, ताकि उद्योग को उजड़ने से बचाया जाए
उन्होंने सबंधित प्रशासन से गुहार लगाई कि अगर उन्हें शिफ्ट करना ही है। उन्हें डेयरियां शिफ्ट करने के लिए कम से कम छ: महीने का समय और दिया जाए तथा अगर उनको फतेह सिंह कालोनी में शिफ्ट करना इतनी ही जरूरी है तो वहां (फतेह सिंह कालोनी) की जमीन को सस्ते रेटों पर व आसान किश्तों में देने का प्रबंध किया जाए। उन्होंने कहा कि वह अदालत में भी दोबारा याचिका दायर करेंगे कि ताकि उन्हें तथा इस उद्योग को उजड़ने से बचाया जाए। इस अवसर पर नव्या चुघ, गुरप्रीत बाठ, मनीष चुघ, हरमिन्दर सिंह गुल्लू, धन्ना सिंह, बंटी साह, घुक्क पहलवान, बिंदा बाजवा, प्रगट सिंह, टैनी परधान, माना सिंह, चंद्र मोहन आदि उपस्थित थे।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

