पंजाब में वोट प्रतिशत में गिरावट ने खड़े किए कई सवाल

punjabkesari.in Tuesday, Feb 22, 2022 - 05:39 PM (IST)

जालंधर (अनिल पाहवा): पंजाब में पिछले करीब 6 महीने से चल रहा चुनावी शोर कुछ हद तक थम गया है। राज्य में हुए चुनावों के परिणाम 10 मार्च को आने हैं जिसके बाद स्थिति साफ होगी कि प्रदेश में किसकी सरकार बन रही है। वैसे आम तौर पर चुनावों के बाद परिणाम आने के साथ लोगों की जिज्ञासा शांत हो जाती है, लेकिन इस बार बाकी राज्यों के चुनावों के कुछ चरण बाकी हैं, जिसके कारण पंजाब का चुनाव परिणाम करीब 18 दिन बाद आएगा। पहले चुनावों को लेकर चर्चा और अब चुनाव परिणाम को लेकर गली-मोहल्ले, घर, खेत, दफ्तर सब जगह पर चर्चा शुरू हो चुकी है। सबसे बड़ी चर्चा यह हो रही है कि पंजाब में इस बार आखिर वोट प्रतिशत क्यों कम रहा। राजनीति के माहिर सियासी पंडित भी इस बार वोट प्रतिशत में करीब 5 प्रतिशत की आई गिरावट को लेकर हैरान हैं। इसे लेकर गहन मंथन और चिंताएं भी चल रही हैं। इस संबंध में जो अब तक की तस्वीर सामने आई है, उसमें वोट प्रतिशत के गिरने के कई तरह के कारण सामने आ रहे हैं। इनमें से कौन सा कारण सही है, वह तो आने वाले समय में ही पता लगेगा। 

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सरकारों के प्रति नाराजगी
पंजाब से लेकर अन्य राज्यों तक लोगों के ऊपर 2019 में कोरोना महाकाल बनकर आया। इस दौर में कई लोगों को अपने काम-धंधे, नौकरी तथा आय के अन्य साधनों से हाथ धोना पड़ा। कई परिवारों ने अपनो को खोया तो कई परिवारों ने अपनों को बचाने के लिए अपनी जान लगा दी। इस सबके बीच हर परेशानी में फंसे व्यक्ति को कहीं से भी कोई आशा की किरण नहीं दिखी। इस मुश्किल घड़ी में न तो सरकारें काम आईं और न ही सरकारों के प्रतिनिधि। इसके बाद लोगों की एक सोच बन गई कि उनके ऊपर पड़ी मुसीबत से उन्हें खुद ही दो-दो हाथ करने होंगे। उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। लोगों के अंदर यह भावना घर कर गई। मुश्किल की घड़ी काफी हद तक टल चुकी है लेकिन लोगों के अंदर सरकारों के प्रति जो उदासीनता है, वह कम नहीं हो रही। शायद यह एक बड़ा कारण था कि लोग राजनीतिक दलों से विमुख हो गए और उनमें वोट के प्रति कोई रूझान ही नहीं था। लोगों ने वोट करने की बजाय परिवारों के साथ मौज-मस्ती करने या घर बैठकर आराम करने को ही बेहतर समझा। यह भी एक बड़ा कारण समझा जा रहा है, जो वोट प्रतिशत के गिरते आंकड़े के लिए जिम्मेदार हो सकता है। 

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विदेश का बढ़ता क्रेज
पंजाब में विदेश जाने का क्रेज किसी से छिपा हुआ नहीं है। चाहे किसी जिंमीदार के बच्चे हों, किसी बैंक आफिसर के या फिर  किसी व्यापारी के बच्चे हों। हरेक पंजाब से उड़कर विदेश की धरती पर लैंड होने को पहल दे रहा है। लोकसभा में विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन राव ने एक सवाल के जवाब में आंकड़ा जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2016 से फरवरी 2021 तक पंजाब तथा चंडीगढ़ से 9.84 लाख लोग विदेश में चले गए हैं। इनमें से 3.79 लाख विद्यार्थी तथा 6 लाख वर्कर थे। इस आंकड़े में चंडीगढ़ भी शामिल है, लेकिन यह बात साफ है कि विदेश जाने वाले लोगों में अधिकतर संख्या पंजाब के लोगों की ही है। खबर यह भी है कि पंजाब के कई गांव पूरी तरह से खाली हो गए हैं और वहां के लोग कनाडा या अन्य देशों में शिफ्ट हो गए हैं। इस पूरे मामले में यह बात तो साफ हो गई है कि करीब 5 सालों में पंजाब से ही 7.5 लाख के करीब लोग शिफ्ट हो चुके हैं, जिनमें से अधिकतर वोटर थे। पंजाब में 2.14 करोड़ कुल मतदाता हैं और सरकारी मत सूचियों में अभी भी इन विदेश गए लोगों के नाम काटे नहीं गए हैं। यह भी एक कारण है कि पंजाब में पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले इस बार करीब 5 प्रतिशत वोट आंकड़ा गिर गया है। 

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युवा वर्ग में रुचि नहीं
पंजाब में पिछले पांच वर्ष में करीब 14 लाख नया वोटर जुड़ा है। 2017 में पंजाब में 2 करोड़ वोटर था, जो अब बढ़कर 2.14 करोड़ हो गया है। इसमें अधिकतर युवा वर्ग है, जिन्हें इन पांच वर्षों में वोट डालने का अधिकार मिला है। राजनीतिक माहिरों और सियासी पंडितों का कहना है कि ये युवा वर्ग घर से निकला ही नहीं और न ही उसने वोट करने में कोई खास दिलचस्पी दिखाई। यह नहीं कि बिल्कुल युवा घर से नहीं निकला, बल्कि जो युवा घर से निकला, उसका वोट प्रतिशत बहुत कम है। इस सबके बीच यह बात सामने आई है कि सरकारों के गठन से युवा वर्ग को कोई लेना-देना नहीं है। शायद युवा वर्ग की यह सोच है कि सरकार कोई भी हो, उन्हें नौकरी, शिक्षा, हैल्थ से जुड़े मसलों को अपने दम-खम पर ही हल करना पड़ेगा। सरकारों के प्रति युवाओं की यह सोच बेहद खतरनाक है, जो आने वाले समय में भारत की व्यवस्था को नुक्सान पहुंचा सकती है। 

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एन.आर.आईज की बेरुखी
हर बार राज्य के चुनावों में एन.आर.आईज वर्ग का बड़ा झुकाव देखने को मिलता है। लेकिन इस बार के हुए विधानसभा चुनावों में एन.आर.आई. वर्ग द्वारा बहुत कम रुचि दिखाई गई है। इससे पहले 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में 1.25 लाख एन.आर.आई. पंजाब पहुंचा था। पंजाबभर से दो करोड़ से अधिक लोग विदेशों में बसे हुए हैं। पिछले चुनावों में एन.आर.आईज. से कई वायदे किए गए थे, लेकिन उम्मीदवार उन वादों पर खरे नहीं उतरे। 

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दूसरा सबसे बड़ा कारण यह था कि कोरोना वायरस के कारण सभी देशों में एंट्री पर कई तरह के नियम लागू हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए भी इस बार पंजाब में विदेशों से आने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रही। यह भी एक बड़ा कारण था कि विदेशों में रह रहा पंजाब का एन.आर.आई. पोलिंग बूथ तक पहुंचा ही नहीं। 

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प्रशासन की अव्यवस्था
पंजाब में एक तरफ तो चुनाव आयोग ने पिंक बूथ बना रखे थे और पहली बार वोट डालने वालों के लिए सैल्फी स्टैंड तक बनाए हुए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि पोलिंग स्टेशन पर मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी। सुबह जब वोटिंग शुरू हुई तब तो लोगों को बूथ तक मोबाइल ले जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन पंजाब में जैसे-जैसे वोटिंग का ट्रैंड तेज होता गया, पोलिंग स्टेशनों पर सख्ती बढ़ती गई। दोपहर 12 बजे के बाद पोलिंग स्टेशनों पर मोबाइल लाने वालों को वापस मोड़ दिया गया। हैरानी इस बात की है कि अगर वोटर को सैल्फी के लिए सैल्फी स्टैंड की सुविधा दी गई है तो वह आखिर फोटो किसके साथ खींचेगा। जालंधर के एस.डी. कालेज में भी इस तरह की व्यवस्था के चलते कई वोटर वापस लौट गए। गेट पर तैनात पंजाब पुलिस के कर्मचारी ने लोगों को मोबाइल ले जाने नहीं दिया, जो व्यक्ति घर से अकेला वोट डालने आया है, वह या तो मोबाइल घर रखकर आएगा। इसके अलावा उसके पास मोबाइल को सेफ रखने का कोई चारा ही नहीं था, जिस कारण बहुत सारे वोटर वापस लौट गए। यह व्यवस्था जालंधर ही नहीं, बल्कि लुधियाना, अमृतसर सहित कई जिलों में पोलिंग स्टेशनों पर देखने को मिली, जिसके कारण वोटर निराश दिखा। 

2017 में कुल वोटर-2 करोड़
2022 में कुल वोटर-2.14 करोड़

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पांच साल में बढ़े वोटर-14 लाख
2017 में मतदान प्रतिशत-77.36%
2022 में मतदान प्रतिशत-71.95%
कुल मतदाता-2,14,99,804 
पुरुष-1,02,00,996
महिलाएं-1,12,98,081
ट्रासजैंडर- 727

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News Editor

Urmila

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