सरकार किसी की भी बने, बड़ा सवाल- कहां से आएंगे चयन वादों के लिए 33 हजार करोड़ रुपए?

punjabkesari.in Tuesday, Mar 08, 2022 - 02:30 PM (IST)

जालंधर(अनिल पाहवा): पंजाब चयन का पिटारा खुलने वाला है। किस की सरकार बनेगी, गुरुवार को ही स्पष्ट हो जाएगा। वैसे जो एग्जिट पोल आए हैं, ने अपनी, संभावनाएं प्रकट कर दीं हैं परन्तु असली नतीजा जब तक नहीं आता, हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकते। पंजाब में सरकार भी बन जाएगी, मंत्री भी बन जाएंगे, सी.एम. भी बन जाएगा और पहले की तरह सरकार के काम शुरू हो जाएंगे परन्तु बड़ा सवाल यह है कि आम लोगों के साथ मतदान में जो वादे किए गए, उसके लिए जरूरी लगभग 33,000 करोड़ कहां से आएंगे। आप सोच रहे होंगे कि यह संख्या कहां से आया है तो हम आपको इसके पूरे आंकड़ो का विवरण भी देंगे और मौजूदा सरकार की हालत भी बताएंगे।

मुफ्त यूनिट के 78,00 करोड़ रुपए
पंजाब में सरकार किसी की भी बने, कम से कम 300 यूनिट बिजली हर महीने मुफ्त देने का वायदा किया गया है। वायदा तो कर दिया परन्तु 300 यूनिट बिजली देने का मतलब है कि राज्य पर 7800 करोड़ रुपए का फालतू भार। पंजाब में 70.61 लाख बिजली के खपतकार हैं, जो हर महीने 1500 करोड़ रुपए के लगभग यूनिट खर्च कर रहे हैं। बदले में खपतकार लगभग 9500 करोड़ रुपए बिल के तौर पर अदा कर रहे हैं। सब्सिडी के तौर पर पंजाब सरकार 14,500 करोड़ रुपए पहले ही सहन कर रही है। इस नए भार के बाद पंजाब में बिजली का ही भार लगभग 22000 करोड़ रुपए हो जाएगा।

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महिलाओं को 11000 करोड़ रुपए
पंजाब की मतदान दौरान 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को 1000-1000 रुपए प्रति महीना देने का वायदा किया गया है। आंकड़ों से मुताबिक पंजाब में 1 करोड़ के लगभग 18 वर्ष से ऊपर की उम्र की लड़कियां और महिलाएं हैं। इसके साथ राज्य पर लगभग 11000 करोड़ रुपए का नया भार पड़ेगा। इस भार को कैसे सहन करना है, इस बारे अभी कोई नहीं सोच रहा। कुछ पार्टियों ने महिलाओं को पैसों के साथ-साथ सिलेंडर और अन्य सहूलियतें देने का भी ऐलान किया है। ऐलान करने वालों ने यह अनुमान नहीं लगाया कि पैसा कहां से आना है?

बुढापा पैंशन का 4600 करोड़ रुपए
पंजाब में सरकार की तरफ से 1500 रुपए प्रति महीना बुढ़ापा पैंशन दी जा रही है। मतदान में जो वायदा किया गया, उस हिसाब के साथ यह पैंशन लगभग 3100 रुपए प्रति महीना हो जाएगी। बुढापा पैंशन बढ़ाने के बाद लगभग 4600 करोड़ रुपए का फालतू भार पंजाब के खजाने पर पड़ेगा।

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पहले ही मुश्किल में
पंजाब में लगभग 50 हजार करोड़ रुपए अलग-अलग योजनाओं के लिए चाहिए। इनमें से लगभग 33 हजार करोड़ रुपए नई योजनाओं कारण पड़ने वाले भार के हैं। सरकारी आंकड़ों से मुताबिक 2020-21 में सरकार को कुल 68,995 करोड़ रुपए राजस्व हासिल हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि 50 हजार करोड़ रुपए की रकम इस राजस्व का लगभग 72 प्रतिशत बनता है। इस के अलावा सरकार का लगभग 20 प्रतिशत खर्च कर्जे पर ब्याज देने में ही हो रहा है। इन 2 मदों पर कुल राजस्व का 92 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो रहा है। इस हालत में बाकी की रकम कैसे खर्च की जाएगी और यह कहां से आएगी?

दूसरी सहूलियतों के लिए 10,000 करोड़ रुपए
वादे तो कर लिए परन्तु वायदों को पूरा करने के लिए जो फालतू भार पंजाब पर पड़ेगा, के लिए पैसा कहां से आएगा? इस पर किसी ने न तो कोई रोडमैप तैयार किया है और न ही कोई योजना बनाई है। उक्त गिनाए गए भार के साथ-साथ लगभग 10,000 करोड़ रुपए का अन्य भार पंजाब पर पड़ेगा। वादे राजनीतिक पार्टियों के मेनीफेस्टो में किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर महिलाओं को 8-8 सिलेंडर, नौजवानों को 20-20 हजार रुपए और लैपटाप देने के साथ खर्च बढ़ेगा। यह खर्च कुल मिला कर पहले से चल रहे और नए जोड़े गए खर्चे मुताबिक 50,000 करोड़ तक बनता है इसलिए किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए कोई ब्ल्यू प्रिंट तैयार नहीं किया है। 

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News Editor

Urmila

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