स्वास्थ्य विभाग में डेपुटेशन का खेल! वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे कर्मचारी
punjabkesari.in Tuesday, Jun 30, 2026 - 12:06 PM (IST)
अमृतसर (दलजीत): पंजाब के स्वास्थ्य विभाग में डेपुटेशन के नाम पर चल रही अनियंत्रित व्यवस्था अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। जहां डेपुटेशन एक अस्थायी तैनाती होनी चाहिए वहीं असल में यह कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए 'स्थायी कुर्सी' बन चुकी है। अमृतसर जिले सहित कई जगहों पर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां लोग वर्षों से नहीं बल्कि अपनी पूरी नौकरी डेपुटेशन पर काटकर सेवानिवृत्त हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार यह सिर्फ एक आम प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित प्रणाली की तरह काम कर रहा है। कुछ उच्चाधिकारियों की सहायता से मनपसंद जगहों पर तैनाती लेकर कर्मचारी लंबे समय के लिए वहीं जम जाते हैं। इससे न केवल ट्रांसफर नीति की धज्जियां उड़ रही हैं बल्कि विभाग के भीतर न्याय और पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
अमृतसर बना केंद्र बिंदू
अमृतसर के स्वास्थ्य विभाग में डेपुटेशन का यह रुझान विशेष रूप से चर्चा में है। कई डॉक्टर और कर्मचारी लंबे समय से एक ही सीट पर बैठे हैं और उनकी तैनाती बार-बार बढ़ाई जाती है। इनमें से कई मनमर्जी वाली सीटों पर लगे हुए हैं। अधिकारियों की 'गुड बुक' में रहकर ये लोग अपनी सीटों पर काबिज हैं।
डेपुटेशन का मतलब ही बदला
नियमों के अनुसार डेपुटेशन एक अस्थायी व्यवस्था होती है जिसका उद्देश्य खाली पदों को भरना या जरूरी सेवाओं को जारी रखना होता है लेकिन मौजूदा हालातों में यह अस्थायी व्यवस्था 'पक्की जगीर' में तब्दील हो चुकी है। इससे न केवल सिस्टम की न्यायपूर्णता खत्म हो रही है बल्कि अन्य कर्मचारियों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।
योग्य कर्मचारी हो रहे निराश
विभाग के भीतर काम कर रहे कई कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि अगर कुछ लोग ही सालों तक एक ही पोस्ट पर काबिज रहेंगे तो बाकी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति और अनुभव के अवसर कम हो जाते हैं। इससे उनके मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
बिना उच्चाधिकारियों की मंजूरी के यह सब कुछ कैसे संभव है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना उच्चाधिकारियों की मंजूरी के यह सब कुछ कैसे संभव है? डेपुटेशन की फाइलें उच्च स्तर पर ही मंजूर होती हैं जिसके कारण मिलीभगत के आरोप और भी गंभीर हो जाते हैं।
आम लोगों पर असर
स्वास्थ्य विभाग जो सीधे तौर पर जनता की सेवा से जुड़ा हुआ है। वहां इस तरह की अनियंत्रित व्यवस्था का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। जहां पारदर्शिता कम होती है वहां सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
सरकार के लिए बड़ी चुनौती
यह मामला अब सिर्फ एक विभागीय गड़बड़ी नहीं रह गया है बल्कि सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन चुका है। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो यह व्यवस्था और भी खराब हो सकती है।
क्या कहना है सिविल सर्जन का?
सिविल सर्जन डॉ. रश्मि विज से जब इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह पता लगाएंगी कि कौन से कर्मचारी और डॉक्टर जिले में लंबे समय से डेपुटेशन पर लगे हुए हैं। उक्त जानकारी हासिल करके इसे उच्चाधिकारियों के ध्यान में लाया जाएगा।
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