Ludhiana : नए अस्पतालों की एंट्री से डॉक्टरों का बढ़े भाव, ऑफर्स की बरसात शुरू
punjabkesari.in Wednesday, Apr 22, 2026 - 11:09 PM (IST)
लुधियाना (सहगल) : शहर के निजी अस्पतालों में कार्यरत प्रसिद्ध व वरिष्ठ डॉक्टरों पर शिकारियों की नजर है, जिले के अंदर अथवा आसपास बनने वाले नए अस्पतालों के प्रबंधकों के सक्रिय होने पर डॉक्टरों का मानना है कि उन पर लक्ष्मी फिर से मेहरबान होने जा रही है। शहर में बनने वाले नए अस्पतालों के प्रबंधकों की नजरें निजी अस्पतालों के डॉक्टर पर हैं, जिनकी मरीजों में गहरी पेठ है। हालांकि यह सिलसिला भी शुरू हुआ बताया जाता है परंतु आने वाले दिनों में कई अस्पतालों से आने वाली ऑफर शहर के डॉक्टर के भाव बढ़ा सकती है। वहीं निजी और कॉर्पोरेट अस्पताल प्रबंधनों की नींदे अब उड़ने को है। यह दौर पहले भी चल चुका है। इसमें कई अस्पतालों ने निजी अस्पतालों के रिटायर होने वाले डॉक्टर पर ही दांव आजमाया तो कई बड़ी मछलियां उनके कांटे में फस गई, परंतु कॉर्पोरेट अस्पतालों का वातावरण इस तरह का है कि थोड़े से बाद ही डॉक्टर कीटन ओवर पर सवाल किए जाने लगे। इस पर इन अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों का कहना है कि जब निजी और कॉर्पोरेट अस्पतालों के वातावरण के अनुरूप ही चलना है तो क्यों ना अपने भाव भी बढा लिए जाएं।
यहां यह भी गौरतलब है कि कई अस्पतालों ने जब डॉक्टर पर प्रलोभन का दाव आजमाया तो उन्हें पैसे के साथ जिस स्पेशलिटी के वह डॉक्टर है, उसे विभाग का उन्हें प्रमुख ना कहकर डायरेक्टर कह दिया परंतु कॉरपोरेट और निजी अस्पतालों के डॉक्टर और उनके प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टर का औहदा इसलिए भी ऊंचा कर दिया कि डॉक्टर को इससे आगे उन्हें इज्जत मिलने वाली नहीं।
एक निजी अस्पताल में कार्य कर रहे डॉक्टर ने कहा कि कि वह वर्तमान अस्पताल की राजनीति से बेहद तंग है , दर्जनों डॉक्टर यहां से जाने को तैयार बैठे हैं। जैसे ही ऑफरों का दौर आया तो कई डॉक्टर सरपट भाग कर नए निजी अस्पतालों का रुख कर लेंगे।
नए आने वाले अस्पतालों द्वारा कई एजेंसी भी हायर कर रखी है जो डॉक्टरों की रेपुटेशन और उनकी ओपीडी का आकलन कर रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधकों को देंगे जिन डॉक्टरों की शहर में काफी साथ है उन्हें पहले ही शॉर्ट लिस्ट कर लिया गया है।
एक निजी अस्पताल प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि वह प्रसिद्ध डॉक्टरो की सूची बनाने के अलावा सेकंड लाइन में आने वाले अपकमिंग डॉक्टरो का भी आकलन कर रहे हैं जो आने वाले समय में सीनियर डॉक्टरों की जगह लेंगे। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि किस डॉक्टर की कितनी ओपीडी है और सप्ताह में कितने मरीज उसकी देखरेख में अस्पताल में भर्ती होते हैं। उन्होंने कहा कि यह अभी शुरुआत है आने वाले समय में इसमें काफी तेजी आएगी और जो तूफान डॉक्टर को आर्थिक तौर पर लुभाने के लिए उठने वाला है, वह अस्पताल प्रबंधकों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

