एनकाउंटर में मारे करनजोत की मां का छलका दर्द, बोली- नहीं पता कब...
punjabkesari.in Tuesday, Sep 15, 2026 - 12:53 PM (IST)
लुधियाना (राज): जिस 25 वर्षीय नौजवान के कंधों पर अपनी बीमार मां के इलाज, जरूरी टेस्ट और आगामी ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी थी, वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। महानगर के आत्म पार्क इलाके में रविवार को एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए दो शूटरों में से एक करनजोत सिंह उर्फ नोना के अमृतसर स्थित घर में इस समय केवल सन्नाटा है। करनजोत की बेसुध मां रजवंत कौर के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि घर के चूल्हे और इलाज के लिए लकड़ी का काम करने वाला उनका सीधा-साधा बेटा कब और कैसे किसी बड़े आपराधिक सिंडिकेट का हथियारबंद शूटर बन गया।
मां के सीने में गूंज रहे आखिरी शब्द, मम्मी, जल्द आऊंगा टेस्ट कराने ले चलूंगा
अमृतसर में अपने आंसुओं को पल्लू में समेटती मां रजवंत कौर ने बताया कि करनजोत पेशे से कारपेंटर था और पूरे घर का अकेला कमाने वाला सहारा था। रजवंत कौर ने रोते हुए कहा कि मेरी तबीयत अक्सर खराब रहती है और डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी थी। रविवार सुबह जब करनजोत घर से निकला, तो मुझसे कह कर गया था, मम्मी, आज काम से जल्दी लौट आऊंगा, तुम्हारे सारे जरूरी मेडिकल टेस्ट करवाने अस्पताल चलना है। रविवार सुबह करीब 11 बजे मेरी उससे फोन पर आखिरी बार बात हुई। उसने बड़े प्यार से कहा कि वह बिल्कुल ठीक है और जल्द घर पहुंचेगा। लेकिन शाम तक बेटा नहीं लौटा, बल्कि विदेश में रह रही बेटी ने फोन कर रोते-बिलखते यह मनहूस खबर दी कि उसका भाई पुलिस एनकाउंटर में मारा गया है।
आइलेट्स की तैयारी और विदेश जाने की चाहत
परिजनों के अनुसार, 12वीं पास करनजोत अपने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए विदेश जाने का सपना देख रहा था। इसके लिए वह बाकायदा आइलेट्स की कोचिंग भी ले रहा था। मां का कहना है कि उन्हें इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि वह गलत संगत या विदेश में बैठे गैंगस्टरों के जाल में फंस चुका है। मुठभेड़ में मारे गए दूसरे साथी के बारे में परिवार ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्होंने उसे पहले कभी नहीं देखा था और न ही उसके बारे में कोई जानकारी थी।
हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं, दहशत में ब्लड कैंप के आयोजक
उधर, जिस ब्लड डोनेशन कैंप के पास यह भीषण एनकाउंटर हुआ, उसके मुख्य आयोजक तरसेम सिंह भी घटना के बाद पूरी तरह स्तब्ध हैं। तरसेम सिंह ने साफ किया कि उनकी या उनके परिवार की किसी के साथ कोई पुरानी रंजिश या दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा यह पूरी तरह से एक निष्पक्ष और सामाजिक आयोजन था, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर 700 यूनिट रक्तदान किया। हमें खुद समझ नहीं आ रहा कि हमलावर इस नेक कार्य और इसमें पहुंचे लोगों को निशाना क्यों बनाना चाहते थे। उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 3 बजे जैसे ही पुलिस की कार्रवाई और खतरे की भनक लगी, उन्होंने तुरंत कैंप को स्थगित कर दिया था।
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