Speak Up India में बोले नवजोत सिद्धू,'शुर्लियों वाली राजनीति छोडऩी होगी'

6/29/2020 9:13:54 AM

जालंधर(रमनदीप सिंह सोढी/सोमनाथ): इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की तरफ से करवाए गए ‘स्पीकअप इंडिया’ प्रोग्राम में शामिल हुए पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर खुलकर भड़ास निकाली। मैं इस प्रोग्राम में सैम पित्रोदा के कहने पर शामिल हुआ हूं, ‘‘बड़ी देर कर दी जनाव आते-आते पर देर आए दुरुस्त आए। अपने शायराना अंदाज में उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह का नाम लिए बगैर विरोधियों पर भी तीखे निशाने साधे। सिद्धू ने शायराना शुरूआत करते हुए कहा -

'वह दरिया ही नहीं जिसमें नहीं रवानी
जब जोश ही नहीं तो लल्हा किस काम की जवानी'

प्रवासियों के दर्द को समझते हुए सिद्धू ने कहा कि बेशक आदमी अपनी धरती से हजारों मील ही दूर क्यों न चला जाए पर उसके मन में अपनी मातृभूमि का प्यार हमेश रहता है। आज जरूरत है कि प्रवासियों को अपने साथ जोड़ा जाए तभी हम पंजाब को बदल सकेंगे। मैं महसूस करता हूं कि आपको बनता मान-सम्मान मिलना चाहिए। मेरा मानना है कि पंजाब और देश की तस्वीर बदलनी है तो यह ओवरसीज इंडियन के बिना संभव नहीं। जब भी कभी देश और राज्य पर आफत आएगी तो सियासी होना पड़ेगा। गैर सियासी तो भेडि़ए होते हैं। 

‘‘सौ भेड़ों के आगे एक शेर लगा दो तो भेड़ें भी शेर हो जाती है। 
और सौ शेरों के आगे एक भेड़ लगा दे तो शेर भी भेड़ हो जाते हैं।’’

मैं पंजाब की मुश्किलों का हल बड़ी अच्छी तरह से जानता हूं। हमें हवाई राजनीति से बाहर होकर जमीन पर आने जरूरत है। शुर्लियों वाली राजनीति छोडऩी होगी। मैं नीति, नीयत और न्याय में विश्वास रखता हूं।पंजाब को ब्रांड पंजाब बनाने की जरूरत है। 2 प्रतिशत लोग दुनिया का पेट  भर रहे हैं। मैं 32 करोड़ की आमदनी छोड़कर करियर बनाने नहीं आया। सिद्धू आज भी पंजाब के साथ खड़ा है। मैं नीति, नीयत और न्याय मांगता हूं। आज सियासत मैली हो गई है। लीडर कठपुतलियां बन गए हैं। असल लीडर वो होता है जो खुद के नफे-नुक्सान को न देखते हुए आवाम की सोचे। हमें रेड, पर्चों और इन्कवायरियों से नहीं डरना चाहिए। मैं सभी मुद्दों पर चुप होकर नहीं बैठ सकता। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। आज जरूरत ‘पगड़ी संभाल जट्टा...’ की है। 


सिस्टम फेल हो गया है, सुधार क्यों नहीं करते?
आज पंजाब के टेलैंट मौका नहीं मिलने के कारण विदेश भाग रहा है। इलैक्शन अगले इलैक्शन के लिए नहीं होते। सिस्टम लोगों को नोच-नोच कर खा रहा है। सिस्टम फेल हो गया है। उसमें सुधार क्यों नहीं करते। आज नौजवानों को क्वालिटी एजुकेशन व मौके प्रदान करने की आवश्यकता है। हमें यूथ पॉलिसी लाजिमी बनानी होगी ताकि हमारा टेलैंट विदेश नहीं जाए।


तुम्हारी नीयत में खराबी है
पंजाब का पैसा प्राइवेट जेबों में जा रहा है। लोगों का पैसा लोगों के पास जाना चाहिए। आज डैमेज कंट्रोल हो सकता है लेकिन देर हो गई तो डैमेज कंट्रोल नहीं होगा। सिद्धू ने पंजाब के घट रहे रैवेन्यू की बात करते हुए कहा कि 'तालियों का जोरा इतना, तहजीब का शोर इतनाबरकत क्यों नहीं हुई,  तुम्हारी नीयत में खराबी है।' 1997 में पंजाब पर 15,000 करोड़ का कर्ज था जो 2001 में बढ़कर 32,496 करोड़ हो गया। फिर यह कर्ज 2007 में 48,344 हजार करोड़ से होते हुए 2017 में डेढ़ लाख करोड़ और फिर 1,87000 करोड़ और अब 2,48,000 करोड़ रुपए हो गया है। आज पंजाब की सरकारी संपत्तियां गिरवी रख दी गई हैं। समस्य है तो संजीवनी भी है। मैं सिर्फ समस्या नहीं बताता। संजीवनी भी बताता हूं। आज जरूरत है कि हम तमिलनाडु की तरह शराब व रेत का रैवेन्यू बढ़ाएं। यह पैसा चंद लोगों की जेब में जाने की बजाय पंजाब की विकास राशि में जाना चाहिए। यह पैसा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए। मुझे बड़े अफसोस से कहना पड़ रहा है कि पंजाब के हुकमरानों ने पंजाब को गिरवी रख दिया है। मेरा मन तब खुश होगा जब एक रिक्शा चालक का बेटा सरकारी स्कूल में पढ़कर आईएएस बन जाएगा, वही असल पंजाब होगा।

कोरोना ने पंजाब की कमर तोड़ दी
कोरोना पर बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि एक तो करेला और ऊपर से नीम चढ़ा। पंजाब के हालात पहले ही बहुत खराब थे। ऊपर से कोरोना ने हमारा रैवेन्यू खत्म कर दिया है। आज पंजाब के 62,000 करोड़ का है जबकि देनदारी 67000 करोड़ की है। कर्ज उतारने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। पंजाब के तत्काली हालात पर सिद्धू बोले कि यह तो वो बात हुई कि पल्ले नी धेला, कर दी मेला मेला।

सिद्धू के सियासी निशाने
-भाजपा के साथ लडऩे के लिए गांधीवादी नीति अपनाने की जरूरत
-लड़ाई कागजों से नहीं विचारधारा से लड़ी जाती है
प्रवासियों के लिए बोले सिद्धू
-प्रवासियों की जमीनों से कब्जे हटाए जाएं और निवेश के लिए उन्हें मौके प्रदान करें। 
-सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए।
-संपर्क जब टूटता है तो संदेह पैदा होता है। संदेह के धरातल पर विश्वास टूट जाता है।

अंत में सिद्धू ने कहा
वतन की फिक्र कर ए नादान,
मुसीबन आने वाली है,
तेरी बर्बादियों के मशवरे
आसमानों में हैं,
न संभलोगे तो मिट जाओगे 
ए पंजाब वालो,
तुम्हारी दास्तां तक न होगी दास्तां


Vatika

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