कनाडा में हजारों पंजाबी युवाओं की घर हो सकती है वापसी! जारी हुआ नोटिस
punjabkesari.in Saturday, Apr 18, 2026 - 12:09 PM (IST)
पंजाब डेस्क : कनाडा में लागू किए गए नए इमिग्रेशन कानून के बाद वहां रह रहे हजारों पंजाबी युवाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कनाडा में इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने नए C-12 बिल के पास होने के बाद करीब 30 हजार ऐसे लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जो वर्क परमिट खत्म होने के बाद शरणार्थी के तौर पर रह रहे थे। इनमें लगभग 9 हजार पंजाबी स्टूडेंट्स और वर्कर्स बताए जा रहे हैं, जिन पर अब डिपोर्टेशन की कार्रवाई की आशंका मंडरा रही है। यह कदम सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और वास्तविक जरूरतमंदों को ही शरण देने के लिए उठाया गया है। इस फैसले के विरोध में पंजाबी स्टूडेंट्स समेत कई देशों के छात्रों ने विनिपेग में प्रदर्शन कर सरकार से राहत की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से हजारों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
कनाडा सरकार द्वारा लागू किए गए नए इमिग्रेशन नियमों को वर्ष 2025 से प्रभावी माना गया है। इस बदलाव के चलते वे विदेशी नागरिक भी कानून के दायरे में आ गए हैं, जो पहले से ही कनाडा में रहकर काम कर रहे थे। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे पंजाबी स्टूडेंट्स शामिल हैं, जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्क परमिट या शरण के आधार पर वहां काम करना शुरू किया था।
नए नियमों के बाद इन स्टूडेंट्स की स्थिति असमंजस में पड़ गई है। शरण से जुड़ी प्रक्रिया सख्त होने के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी के विरोध में भारतीय स्टूडेंट्स लगातार अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से राहत देने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अचानक नियम बदलने से उनका करियर और मेहनत दोनों खतरे में पड़ गए हैं।
वहीं बता दें कि जिन शरणार्थियों को नोटिस जारी किया गया है उन्हें एक मौका दिया जाएगा ताकि वह उक्त नए कानून के तहत अपनी योग्यता साबित कर सकें। शरणार्थी को जिस दिन नोटिस पर लिखी तारीख मिलती है उसके 21 दिन के अंदर उन्हें अपना जवाब देना होगा। वहीं उन्हें सलाह दी जाती है कि किसी इमीग्रेशन वकील से सलाह-मशविरा करके ही जवाब दें। इस नए नियम के तहत कनाडा आने के एक साल के अंदर ही आवेदन करना होगा। अगर साल के बाद आवेदन किया जाता है तो उसे अयोग्य करार दिया जाएगा।
अगर आवेदन करने में देरी होती है तो उसी शरणार्थी को कानून के तहत राहत मिलेगी जिसके पास कोई ठोस वजह होगी और प्रूफ करना होगा। अगर प्रूफ न दे पाए तो उसके पास 90 दिन का समय होगा जिसके अनुसार वह किसी वकील के जरिए कानूनी मदद ले सकते हैं। वहीं जिन पति-पत्नी के पास पीआर या वैध वीजा है तो वह पीआर के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद आपके पास प्री रीमूवल रिस्क एसेसमेंट का विकल्प एक विकल्प रहेगा जिसके तहत सरकार जांच करेगी कि आपने जो ठोस वजह बताई वह सही है या नहीं। जैसे कि भारत भेजने पर आपकी जान को खतरा है इसकी गहराई से जांच होगी फिर ही आगे की कार्रवाई होगी।
वहीं जिन शरणार्थियों को नोटिस भेजा गया है वह अगर नोटिस मिलने पर अपने आप कनाडा छोड़ कर चले जाते हैं तो उनके पास दोबारा कनाडा आने का मौका होगा। अगर डिपोर्ट कर दिए जाते हैं उस पर कनाडा आने के लिए सदा के लिए वैन लग सकता है। कनाडा इमीग्रेशन विभाग के मुताबिक 30 हजार लोगों में से 30 फीसदी यानी 9 हजार के करीब पंजाबी युवा हैं। ये लोग अस्थायी वीजा या शरण लेकर काम कर रहे हैं।
कनाडा सरकार के इमिग्रेशन मंत्री मार्क मिलर ने नए इमिग्रेशन कानून को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उनका कहना है कि यह बदलाव कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार के मुताबिक, अब शरणार्थी का दर्जा केवल उन्हीं लोगों को दिया जाएगा, जो वास्तव में युद्ध, हिंसा या गंभीर उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों से प्रभावित हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल पीआर (परमानेंट रेजिडेंसी) या वीजा न मिलने के आधार पर किसी व्यक्ति को शरणार्थी नहीं माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि वीजा नियमों का पालन न करने के कारण भारत, मेक्सिको और नाइजीरिया समेत कई देशों के नागरिक अवैध रूप से कनाडा में रह रहे हैं, जिसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी था।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की इस सख्ती के बाद शरणार्थी के तौर पर कनाडा में रुकने का रास्ता लगभग बंद हो गया है। नए कानून के तहत समय सीमा और पात्रता को सख्ती से लागू किया जाएगा, जिससे हजारों विदेशी नागरिकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

