बादल परिवार ने कई बार श्री अकाल तख्त साहिब की तौहीन की: बाजवा

9/12/2019 11:45:26 AM

चंडीगढ़ (भुल्लर): केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल द्वारा मुख्यमंत्री कै. अमरेंद्र सिंह पर श्री अकाल तख्त साहिब का अपमान करने के आरोप को नकारते हुए पंजाब के मंत्री तृप्त राजिंद्र सिंह बाजवा ने कहा कि बादल परिवार ने संकुचित राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए कई बार सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

उन्होंने कहा कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले बादल परिवार अपने गिरेबान में झांके। बाजवा ने कहा कि 31 दिसम्बर, 1998 को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार भाई रणजीत सिंह ने एक हुक्मनामा जारी करके प्रकाश सिंह बादल और गुरचरन सिंह टौहड़ा को हिदायत दी थी कि खालसा पंथ की तीसरी सृजना शताब्दी से पहले कोई भी पक्ष एक-दूसरे का किसी किस्म का नुकसान न करे। परंतु प्रकाश सिंह बादल ने सत्ता के बलबूते पर 16 मार्च, 1999 को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार गुरचरन सिंह टौहड़ा को अध्यक्ष पद से उतार कर श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्मनामे की सरेआम उल्लंघना करके इसकी सर्वो‘चता को चुनौती दी थी।

बाजवा ने कहा कि इस उल्लंघना के दोष में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने जब इस संबंधी अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नेताओं को तलब किया तो बुलावे वाले दिन से पहले ही जत्थेदार भाई रणजीत सिंह को पद से उतारकर एक बार फिर अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की पदवी का अपमान करने के साथ-साथ श्री अकाल तख्त साहिब के सम्मान को ठेस पहुंचाई। बाजवा ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिम कमेटी की बुलाई गई मीटिंग में भाई रणजीत सिंह को हटाकर उनकी जगह भाई मोहन सिंह को नया जत्थेदार नियुक्त करके खत्म हो गई थी और यह अ‘छी खबर देने के लिए कमेटी के सभी मैंबर अमृतसर के सॢकट हाऊस चले गए थे। जब खबर मिली कि भाई मोहन सिंह ने जत्थेदार का पद संभालने से न कर दी है तो इन सदस्यों ने सर्किट हाऊस में ही एक गैर-कानूनी मीटिंग करके ज्ञानी पूरन सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब का नया जत्थेदार स्थापित कर दिया।


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