आखिर कैसे पैदा हो गया पंजाब में बिजली संकट, सामने आए आंकड़ों ने बढ़ा दी Tension

punjabkesari.in Wednesday, Sep 09, 2026 - 03:55 PM (IST)

पंजाब डेस्क : पंजाब में हाल ही में आए बिजली संकट ने हर वर्ग के लोगों को चिंता में डाल दिया है। लगातार कई घंटों तक बिजली कट लगाने के बाद लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद बिजली कटों को बंद कर दिया गया लेकिन फिर अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर राज्य में बिजली संकट पैदा कैसे हो गया।

बिजली उत्पादन क्षमता घटी

राज्य में बिजली उत्पादन के लिए चलने वाले कुछ थर्मल प्लांट 2016 के बाद बंद कर दिए गए। इसके चलते बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ गई। जानकारी के अनुसार 2016 में कुल बिजली उत्पादन क्षमता 6580 MW थी। इसमें 460MW बिजली उत्पादन क्षमता वाला बठिंडा का सरकारी गुरु नानक देव थर्मल प्लांट भी शामिल था, जिसकी चारों यूनिट्स को जनवरी, 2018 में बंद कर दिया गया। इसके अलावा रोपड़ में गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट में भी 6 यूनिट्स चलाए जाते थे जिनकी बिजली उत्पादन क्षमता 1260 MW थी लेकिन 2018 में इनके भी 2 यूनिट्स बंद कर दिए गए। इसके चलते थर्मल प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता घटकर 840 MW हो गई।

इसके अलावा लहरा मोहब्बत में थर्मल प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता 920 MW है। वहीं गोइंदवाल साहिब में प्राइवेट थर्मल प्लांट के तौर पर चल रहे गुरु अमरदास थर्मल प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता 540 MW है लेकिन इसे भी 2024 में PSPCL ने अपने अधीन ले लिया। इसके अलावा राजपुरा और तलवंडी साबो के 2 प्राइवेट थर्मल प्लांट की बिजली उत्पादन क्षमता 3380 MW है। इसके अलावा 2016 के बाद राज्य में कोई भी नया थर्मल प्लांट नहीं लगाया गया है लेकिन पहले से ही चलने वाले थर्मल प्लांट और कुछ यूनिट्स बंद कर दिए गए। इस सबके चलते बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ गई है, जिसका असर अब देखने को मिल रहा है।

बिजली की मांग बढ़ी

जैसा कि ऊपर बता दिया गया है कि 2016 के बाद नया थर्मल प्लांट न लगने और पहले के थर्मल प्लांट और यूनिट्स बंद होने के कारण बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ गई वहीं बिजली की मांग में भी हर साल भारी बढ़ौतरी होती रही। जिसकी पूर्ति के लिए राज्य को बाहर से बिजली खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। जुलाई 2026 में कई सालों के बाद सबसे ज्यादा 17452 MW बिजली की डिमांड थी जिसे PSPCL ने पूरा किया। बता दें कि 2016 में बिजली की मांग सबसे अधिक 11000 MW के करीब थी। पिछले 10 सालों में राज्य में बिजली की मांग में भारी बढ़ौतरी हुई लेकिन न तो कोई नया थर्मल प्लांट लगा और न ही बिजली उत्पादन की क्षमता में बढ़ौतरी हुई। इतना ही नहीं राज्य में जो भी थर्मल प्लांट चल रहे हैं उनकी भी बिजली उत्पादन क्षमता कम हो गई है। जिसके चलते राज्य में बिजली संकट पैदा हो गया।

बिजली उत्पादन क्षमता में क्यों आई कमी

पंजाब के थर्मल प्लांट में कोयले की कमी के चलते, कई तकनीकी दिक्कतों के कारण, हाइडल (पनबिजली) के उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली फीडिंग नहर में खराबी आने के कारण सहित कई कारणों के चलते बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ गई। चाहे राज्य के 2 बड़े प्राइवेट थर्मल प्लांट राजपुरा और तलवंडी साबो में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की पर्याप्त मात्रा है लेकिन अन्य प्राइवेट थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी चल रही है जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। इतना ही नहीं राज्य में चलने वाले सभी थर्मल प्लांटों की बिजली उत्पादन की क्षमता काफी कम हो गई है इसका असर भी बिजली संकट पर पड़ रहा है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि राज्य में केवल कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ रही है।

हालांक इस बिजली संकट को ठीक करने और बिजली की मांग को पूरा करने के लिए राज्य को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। राज्य में बिजली की मांग 15000 MW के करीब पहुंच चुकी है लेकिन थर्मल प्लांट सहित कुल बिजली उत्पादन लगभग 4668 MW है, इस कमी के अंतर को पूरा करने के लिए बिजली खरीदना अनिवार्य हो गया है जिसका बोझ भी राज्य पर पड़ रहा है।

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Content Writer

Sunita sarangal

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