गणतंत्र दिवस पर श्री गुरु तेग बहादुर के बलिदान को दृश्यमान करेगी पंजाब की झांकी

punjabkesari.in Saturday, Jan 23, 2021 - 09:57 AM (IST)

चंडीगढ़(अश्वनी): गणतंत्र दिवस पर इस बार पंजाब की झांकी शाश्वत मानवीय नैतिक-मूल्यों, धार्मिक सह-अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखने की खातिर अपना जीवन कुर्बान करने वाले 9वें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान को दृश्यमान करेगी।

पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर ने अमृतसर में 1 अप्रैल, 1621 को जन्म लिया। मुगलों के विरुद्ध लड़ाई दौरान बहादुरी दिखाने पर उनके पिता एवं छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने उन्हें तेग बहादुर (तलवार के धनी) का नाम दिया। ‘हिंद दी चादर’ के तौर पर जाने जाते महान दार्शनिक, आध्यात्मिक रहनुमा और कवि श्री गुरु तेग बहादुर ने 57 श्लोकों सहित 15 रागों में गुरबाणी रची जिसे दशम पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में शामिल किया।

श्री गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व को दर्शाती समूची झांकी चारों ओर रूहानियत की आभा बिखेरेगी। ट्रैक्टर के अगले हिस्से पर पवित्र पालकी साहिब सुशोभित होगी। ट्रेलर वाले हिस्से के शुरू में ‘प्रभात फेरी’ और संगत कीर्तन करती दिखाई देगी। आखिरी हिस्से में गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब को दिखाया गया है, जो उस जगह स्थापित किया गया है, जहां भाई लक्खी शाह वंजारा जी और उनके पुत्र भाई नगाहिया जी ने गुरु साहिब के बिना शीश के शरीर का संस्कार करने के लिए अपना घर जला दिया था।


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Sunita sarangal

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